बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस लेने के फैसले के बाद विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की।
प्रशांत किशोर ने कहा कि सुरक्षा को लेकर वही लोग चिंतित होते हैं जो इसे अपने स्टेटस और पहचान का प्रतीक मानते हैं। उन्होंने कहा कि जन सुराज के कार्यकर्ता और नेता सुरक्षा घेरे में रहने की बजाय सीधे जनता के बीच रहकर काम करने में विश्वास रखते हैं। उनके अनुसार, वे पहले भी गांव-गांव पैदल घूमकर लोगों से मिलते रहे हैं और आज भी उसी तरह जनता के बीच मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों की सुरक्षा बढ़ाई गई है या घटाई गई है, इस विषय पर प्रतिक्रिया देने का अधिकार उन्हीं को है। जन सुराज का मानना है कि जनता का समर्थन ही सबसे बड़ी सुरक्षा है और राजनीतिक नेताओं को लोगों के बीच रहकर काम करना चाहिए।
दरअसल, बिहार सरकार के गृह विभाग ने हाल ही में एक आदेश जारी कर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को दी गई Z+ श्रेणी की सुरक्षा समाप्त कर दी है। हालांकि, दोनों पूर्व मुख्यमंत्री होने के कारण उन्हें बिहार सरकार के विशेष सुरक्षा प्रावधानों के तहत सुरक्षा सुविधाएं मिलती रहेंगी।
सरकारी आदेश के अनुसार, राबड़ी देवी को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी) की हाउस गार्ड टीम, महिला और पुरुष अंगरक्षक, बुलेटप्रूफ वाहन तथा एस्कॉर्ट वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं लालू प्रसाद यादव को भी हाउस गार्ड टीम, अंगरक्षक, पायलट वाहन, एस्कॉर्ट और बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा दी जाएगी।
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्हें पहले की तरह Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। इसके तहत उनके साथ अंगरक्षक, हाउस गार्ड और एस्कॉर्ट वाहन की व्यवस्था जारी रहेगी।
बिहार सरकार के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था समय-समय पर समीक्षा के आधार पर तय की जाती है।