चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की निगरानी में क्यों आए सेना के दो शीर्ष अधिकारी? जानिए पूरा मामला

Vin News Network
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शी चिनफिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में सेना के दो वरिष्ठ अधिकारी जांच के घेरे में

चीन में एक बार फिर सत्ता और सेना के शीर्ष स्तर पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में देश की सेना के भीतर चल रहे सख्त अनुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब शी चिनफिंग लगातार सेना पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।

किन अधिकारियों पर गिरी गाज?

जांच के दायरे में आए अधिकारियों में

जनरल झांग यूक्सिया और

लियू झेनली
शामिल हैं। दोनों ही चीन की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था केंद्रीय सैन्य आयोग (Central Military Commission – CMC) से जुड़े शीर्ष पदों पर रहे हैं। सीएमसी सीधे राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नियंत्रण में काम करती है और चीन की सेना की नीति व रणनीति तय करने में इसकी अहम भूमिका होती है।

अनुशासन और कानून उल्लंघन के आरोप
चीनी रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि दोनों अधिकारियों पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप हैं। हालांकि, चीनी सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि आरोपों की प्रकृति क्या है और किस तरह के मामलों की जांच की जा रही है।

रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया कि
“कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) की केंद्रीय समिति में विचार-विमर्श के बाद झांग यूक्सिया और लियू झेनली के खिलाफ जांच शुरू करने का फैसला लिया गया है।”

शी चिनफिंग का ‘शुद्धिकरण अभियान’
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर CNN, के मुताबिक यह कार्रवाई चीन में चल रहे व्यापक Anti-Corruption Purge यानी भ्रष्टाचार और निष्ठा-विरोधी अभियान का हिस्सा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये दोनों अधिकारी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के प्रति अपनी पूरी निष्ठा साबित करने में नाकाम रहे।

शी चिनफिंग के लिए सेना की वफादारी बेहद अहम मानी जाती है। सत्ता में आने के बाद से उन्होंने बार-बार कहा है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को पार्टी और राष्ट्रपति के प्रति पूरी तरह वफादार होना चाहिए।

पहले भी हो चुकी हैं बड़ी कार्रवाइयां
यह पहली बार नहीं है जब चीन में इस तरह की सख्त कार्रवाई की गई हो। 2012 में शी चिनफिंग के सत्ता में आने के बाद से अब तक दो लाख से ज्यादा अधिकारियों को भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों में सजा दी जा चुकी है।

इन कार्रवाइयों में न केवल नौकरशाह, बल्कि सेना, सुरक्षा एजेंसियों और कम्युनिस्ट पार्टी के कई बड़े नेता भी शामिल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह अभियान भ्रष्टाचार के साथ-साथ सत्ता को केंद्रीकृत करने का भी एक जरिया है।

सेना पर नियंत्रण क्यों है अहम?
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की राजनीतिक व्यवस्था में सेना की भूमिका बेहद संवेदनशील है। शी चिनफिंग ताइवान, दक्षिण चीन सागर और अमेरिका के साथ बढ़ते रणनीतिक तनाव के बीच यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सेना पूरी तरह उनके नियंत्रण में रहे। इसी वजह से जिन अधिकारियों पर जरा भी संदेह होता है कि वे पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे हैं या नेतृत्व के प्रति पूरी तरह वफादार नहीं हैं, उन्हें तुरंत जांच के दायरे में लाया जाता है।

फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है और दोनों अधिकारियों के भविष्य को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन चीन के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए माना जा रहा है कि अगर आरोप साबित होते हैं, तो इन पर कड़ी कार्रवाई तय है।

जनरल झांग यूक्सिया और लियू झेनली के खिलाफ जांच यह साफ संकेत देती है कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग चीन की सेना में अनुशासन, वफादारी और नियंत्रण को लेकर कोई ढील नहीं देना चाहते। यह मामला न केवल चीन की आंतरिक राजनीति, बल्कि उसकी सैन्य रणनीति और वैश्विक छवि के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

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