उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 417 करोड़ रुपए की लागत वाले इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर को स्‍वीकृति दी गई

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गेहूं और चावल के बाद उपभोग के लिहाज से आलू का स्थान तीसरे नंबर पर आता है। चीन के बाद भारत आलू उत्पादन में दूसरे नंबर पर हैं।

Vin News Network
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उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 417 करोड़ रुपए की लागत वाले इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर को स्‍वीकृति दी गई

नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के सिंगरा में अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की मंजूरी को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गेहूं और चावल के बाद उपभोग के लिहाज से आलू का स्थान तीसरे नंबर पर आता है। चीन के बाद भारत आलू उत्पादन में दूसरे नंबर पर हैं। आलू प्रमुख फसल भी है एवं खाद्य सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद जरूरी है, लेकिन भारत में मुख्यतः आलू की टेबल वैरायटी का उत्पादन होता है, जबकि निर्यात बाजार में प्रोसेस करने योग्य किस्मों की मांग होती है। इसमें जर्म प्लाज्म का भंडार होगा, जिसका उपयोग करके अधिक उत्पादकता वाले बीज तैयार किए जाएंगे। केंद्र सरकार द्वारा ऐसी नई किस्मों के प्रजनन का कार्य किया जाएगा जो जलवायु अनुकूल हों और गर्मी, रोगों तथा कीटों के प्रतिरोधी क्षमता से परिपूर्ण हों। इस केंद्र के माध्यम से बायोफार्टिफाईड किस्मों के विकास पर भी बल दिया जाएगा। ऐसी वैरायटी बनाने पर भी जोर होगा, जिसे मुधमेह के मरीज भी खा सके।

शिवराज सिंह ने कहा कि वर्तमान में, आलू का अधिकांश उत्पादन उत्तर भारतीय राज्यों में होता है और विंध्य पर्वत श्रृंखला के दक्षिण में उत्पादन बहुत कम है, इसलिए इस केंद्र के माध्यम से विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार उपयुक्त आलू की किस्मों के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा। अभी देश में 34 प्रतिशत आलू का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है, जिसमें आगरा व आस-पास के क्षेत्र प्रमुख है, इसलिए आगरा में इस केंद्र की स्थापना का निर्णय लिया गया है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने यह भी बताया कि केवल आलू ही नहीं बल्कि अन्य कंदीय फसलों जैसे शकरकंद उसके भी गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की दिशा में कार्य करेगा। शिवराज सिंह ने बताया कि एक समन्वय समिति का भी गठन किया जाएगा, जिसमें भारत सरकार के कृषि सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक शामिल रहेंगे। शिवराज सिंह ने बताया कि केंद्र के माध्यम से जो भी वैरायटी तैयार की जाएगी, उस पर भारत सरकार का आधिपत्य होगा। सभी वैराइटी पर हमारा नियंत्रण रहेगा।

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