विन न्यूज़ नेटवर्क। देश में पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती मांग के कारण किसान अब ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें कम समय, कम लागत और बेहतर मुनाफा मिले। ऐसी ही एक फसल है भूमि आंवला, जिसे औषधीय गुणों के कारण “ग्रीन गोल्ड” भी कहा जाने लगा है।
भूमि आंवला कोई बड़ा पेड़ नहीं बल्कि एक छोटा हर्बल पौधा है। इसके पत्तों के नीचे छोटे-छोटे फल लगते हैं, जो देखने में आंवले जैसे दिखाई देते हैं। आयुर्वेद में इसका उपयोग विशेष रूप से लिवर संबंधी रोगों, पीलिया और कई अन्य हर्बल दवाओं के निर्माण में किया जाता है। यही वजह है कि आयुर्वेदिक दवा कंपनियों में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है।
कब करें भूमि आंवला की बुवाई?
विशेषज्ञों के अनुसार भूमि आंवला की खेती के लिए गर्म और हल्की नमी वाला मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसकी बुवाई के लिए जून और जुलाई का महीना आदर्श होता है, क्योंकि इस दौरान मानसून की शुरुआत हो जाती है और पौधों को प्राकृतिक नमी मिलती रहती है।
भूमि आंवला की सीधी बुवाई खेत में करने के बजाय पहले नर्सरी तैयार की जाती है। इससे पौधों का विकास बेहतर होता है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।
नर्सरी तैयार करने का तरीका
खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करें। बीजों को नर्सरी में बोया जाता है, जहां उचित नमी और देखभाल के साथ पौधे तैयार किए जाते हैं।
जब पौधों की लंबाई लगभग 10 से 15 सेंटीमीटर हो जाए, तब उन्हें मुख्य खेत में रोप दिया जाता है।
विशेषज्ञ पौधों के बीच 30×30 सेंटीमीटर की दूरी रखने की सलाह देते हैं, जिससे प्रत्येक पौधे को पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व मिल सकें।
फसल की देखभाल आसान, खर्च भी कम
भूमि आंवला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी खेती में ज्यादा देखभाल की आवश्यकता नहीं होती।
मानसून के मौसम में प्राकृतिक वर्षा ही अधिकांश पानी की जरूरत पूरी कर देती है। केवल शुरुआती दिनों में खेत को खरपतवार से मुक्त रखना जरूरी होता है।
इस फसल पर कीट और रोगों का प्रकोप भी बहुत कम देखने को मिलता है। इसलिए महंगे कीटनाशकों और रसायनों पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता, जिससे खेती की कुल लागत काफी कम रहती है।
90 से 100 दिन में तैयार हो जाती है फसल
भूमि आंवला एक कम अवधि वाली औषधीय फसल है। बुवाई के लगभग 90 से 100 दिनों के भीतर पौधे पूरी तरह तैयार हो जाते हैं।
जब पौधों पर पर्याप्त मात्रा में पत्तियां और फल आ जाएं, तब जमीन के पास से पूरे पौधे की कटाई कर ली जाती है।
कटाई के बाद पौधों को सीधे धूप में नहीं, बल्कि छायादार स्थान पर सुखाया जाता है। ऐसा करने से पौधों के औषधीय गुण सुरक्षित रहते हैं।
पूरे पौधे की होती है बिक्री
भूमि आंवला की सबसे खास बात यह है कि आयुर्वेद में इसका पूरा पंचांग यानी जड़, तना, पत्तियां और फल सभी उपयोगी माने जाते हैं।
इस वजह से किसान को पौधे का कोई हिस्सा अलग करने की जरूरत नहीं होती। सूखने के बाद पूरा पौधा बाजार या आयुर्वेदिक कंपनियों को बेचा जा सकता है।
एक एकड़ से कितनी होगी कमाई?
सही तकनीक अपनाने पर एक एकड़ खेत से लगभग 10 से 12 क्विंटल सूखा भूमि आंवला प्राप्त किया जा सकता है।
बाजार में इसकी कीमत आमतौर पर 40 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहती है।
इस हिसाब से किसान एक एकड़ से लगभग 40 हजार से 60 हजार रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं।
कम लागत, बेहतर मुनाफा
भूमि आंवला की खेती में कुल लागत लगभग 8 हजार से 10 हजार रुपये तक आती है। यदि औसत बिक्री मूल्य और उत्पादन को देखा जाए, तो किसान मात्र तीन से चार महीनों में 30 से 50 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं।
यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी यह खेती एक अच्छा विकल्प बनकर उभर रही है।
औषधीय खेती का बढ़ता भविष्य
आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भूमि आंवला जैसी औषधीय फसलों की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बन सकती है।
यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, अच्छी गुणवत्ता के बीजों का उपयोग करें और सीधे आयुर्वेदिक कंपनियों या औषधीय मंडियों से जुड़ें, तो उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। कम लागत, कम समय और बेहतर बाजार मांग के कारण भूमि आंवला आने वाले वर्षों में किसानों के लिए लाभकारी खेती का मजबूत विकल्प साबित हो सकता है।