उत्तराखंड। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बादल फटने की तीन घटनाओं ने तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। धराली और हर्षिल के बीच एक अस्थाई झील बन गई है, जिससे भागीरथी नदी का प्रवाह अवरुद्ध हो गया है। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। पुलिस-प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा है।
ढाई घंटे में फटे तीन बादल
जलशक्ति मंत्रालय के अनुसार, केवल ढाई घंटे के भीतर तीन स्थानों पर बादल फटे, जिससे भारी मात्रा में मलबा और पानी भागीरथी नदी में आया। यह मलबा नदी को रोकता चला गया और अंततः अस्थाई झील का निर्माण हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि झील फटी तो निचले इलाकों में विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।
गंगोत्री हाईवे का संपर्क टूटा
सबसे बड़ा संकट गंगोत्री हाईवे पर पापड़गाड़ के पास उत्पन्न हुआ है, जहां लगभग 30 मीटर सड़क पूरी तरह धंस गई है। इससे हर्षिल और धराली क्षेत्र का जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से संपर्क पूरी तरह कट गया है। जिला प्रशासन की राहत टीमें और आवश्यक सामग्री लेकर जा रही वाहन भी भटवाड़ी में फंस गए हैं।
रातों-रात रेस्क्यू ऑपरेशन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मुखबा, कछोरा जैसे इलाकों से रात में ही लोगों को स्थानांतरित कर दिया। SDRF, NDRF और लोकल पुलिस संयुक्त रूप से राहत-बचाव में जुटे हुए हैं। हेलीकॉप्टरों से राहत सामग्री भेजने की योजना बनाई गई है।

प्रधानमंत्री मोदी का दखल
इस आपदा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधे फोन पर बात की और राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली। सीएम धामी ने बताया कि राज्य सरकार पूरी तत्परता से कार्य कर रही है, लेकिन लगातार बारिश के कारण कार्य में बाधाएं आ रही हैं। प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
यमुनोत्री घाटी में मचा हड़कंप
बड़कोट और यमुनोत्री घाटी में तीसरे दिन भी मूसलधार बारिश जारी है। यमुना और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। स्याना चट्टी में यमुना नदी और कुपड़ा खड्ड में मलबे के बहाव से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। यमुनोत्री हाईवे भी कई स्थानों पर धंसा हुआ है, जिससे आवाजाही पूरी तरह से बंद है।
इनोवा कार फंसी, बाल-बाल बचे यात्री
नरेंद्रनगर प्लास्डा चौकी से आगे भारी बारिश के बीच मलबे में एक इनोवा कार फंस गई। हालांकि समय रहते गाड़ी को निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन ने पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा कर रहे लोगों को अलर्ट रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: 2013 जैसी तबाही का खतरा
IIT रुड़की के हाइड्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर अंकित अग्रवाल का कहना है कि उत्तरकाशी की यह आपदा पैटर्न 2013 में केदारनाथ में आई त्रासदी से मेल खाती है। उन्होंने बताया कि भूमध्य सागर से उठा पश्चिमी विक्षोभ हिमालय से टकराता है, जिससे बादल फटने जैसी घटनाएं होती हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से मानसून और विक्षोभ अब और उत्तर की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। उनके मुताबिक, IIT रुड़की और जर्मनी की पॉट्सडैम यूनिवर्सिटी के बीच चल रही एक इंडो-जर्मन परियोजना के तहत भारतीय हिमालय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी पर रिसर्च हो रही है।
भविष्य की राह
उत्तरकाशी में आई यह आपदा एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को और मजबूत किया जाए। साथ ही अस्थाई निर्माणों और अनियोजित विकास को रोकना होगा।