लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार ने दमदार वापसी की और मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की धारणा सुधरी, जिसका सीधा असर शुरुआती कारोबार में देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स करीब 813 अंकों की छलांग लगाकर 82,722.49 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 256 अंकों से ज्यादा चढ़कर 25,402.23 के ऊपर कारोबार करता नजर आया। बाजार की इस तेजी ने हालिया गिरावट से निवेशकों को राहत दी है।
आज की तेजी के पीछे वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों की अहम भूमिका रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों का भरोसा तब बढ़ा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को जबरन हासिल करने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की अटकलों को खारिज कर दिया और यूरोपीय सहयोगियों पर नए टैरिफ लगाने की योजना से भी पीछे हटने के संकेत दिए। इन बयानों से वैश्विक बाजारों में फैली अनिश्चितता कम हुई और जोखिम लेने की भावना में सुधार देखने को मिला।
घरेलू बाजार में तेजी व्यापक रही। बीएसई और एनएसई के सभी 16 प्रमुख सेक्टर हरे निशान में खुले। बैंकिंग, आईटी, ऑटो, मेटल, फार्मा, एफएमसीजी और रियल्टी जैसे सेक्टरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बाजार की चौड़ाई भी मजबूत रही, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगभग 1-1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिला कि तेजी केवल चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में फैल गई।
एशियाई बाजारों से भी घरेलू निवेशकों को समर्थन मिला। जापान, दक्षिण कोरिया, हांगकांग और अन्य प्रमुख एशियाई सूचकांक लगभग 1 प्रतिशत तक चढ़े। यह तेजी वॉल स्ट्रीट में पिछली रात आई मजबूती के बाद देखने को मिली, जहां अमेरिकी शेयर बाजारों ने राहत भरी रैली दर्ज की थी। वैश्विक इक्विटी में सुधार से उभरते बाजारों, खासकर भारत, में निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
हालांकि इक्विटी बाजारों में तेजी रही, लेकिन सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली। पिछले सत्र में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोना दबाव में रहा, क्योंकि जोखिम वाली परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ने से सुरक्षित ठिकानों की मांग कम हुई। यह बदलाव भी इस बात का संकेत है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल जोखिम उठाने की ओर बढ़ा है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले, जिससे बाजार की धारणा को बल मिला। मनीकंट्रोल के एक सवाल के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच “एक अच्छा समझौता” होने जा रहा है। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर आशावादी संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर निवेशकों के मनोबल पर पड़ा।
गौरतलब है कि इससे पहले के तीन सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में करीब 2-2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। बाजार पर दबाव की कई वजहें थीं, जिनमें ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के पुराने बयान, यूरोपीय संघ के साथ संभावित व्यापार युद्ध की आशंका, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे शामिल थे। इन सभी कारकों ने मिलकर बाजार की धारणा को नकारात्मक बना दिया था।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने बाजार की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राष्ट्रपति ट्रंप का एक और “टैको” यानी “ट्रंप अगेन चिकेन्स आउट” वाला उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पहले ग्रीनलैंड को जबरन हासिल करने की धमकी और अब उससे पीछे हटना बाजारों के लिए राहत लेकर आया है। विजयकुमार के मुताबिक, दावोस में ट्रंप का यह कहना कि ग्रीनलैंड को लेकर भविष्य के किसी समझौते का ढांचा तैयार किया गया है, और इससे भी अहम बात यह है कि अमेरिका यूरोप पर टैरिफ लगाने से बचेगा, ने बाजारों पर छाए दबाव को काफी हद तक कम कर दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और यूरोप के बीच संभावित व्यापार युद्ध की आशंका ही हाल के दिनों में बाजारों को नीचे खींच रही थी। अब जब यह खतरा टलता नजर आ रहा है, तो बाजार में राहत की रैली स्वाभाविक है। विजयकुमार ने यह भी बताया कि बाजार में करीब दो लाख शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स खुले हुए हैं, और मौजूदा ढांचा शॉर्ट-कवरिंग के लिए अनुकूल है। ऐसे में तेजी और तेज हो सकती है।
हालिया तिमाही नतीजों पर बात करते हुए विजयकुमार ने कहा कि कंपनियों की तीसरी तिमाही की लाभप्रदता पर नए श्रम संहिता से जुड़ी प्रतिबद्धताओं के लिए किए गए उच्च प्रावधानों का असर पड़ा है। हालांकि, बाजार इसे एक बार का प्रभाव मानकर नजरअंदाज कर सकता है। निवेशकों को भरोसा है कि आगे की तिमाहियों में इस तरह का दबाव नहीं रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कल घोषित नतीजों में ‘एटरनल’ कंपनी का प्रदर्शन खास रहा। क्विक कॉमर्स बिजनेस से बेहतर-than-expected रेवेन्यू और मुनाफे की ग्रोथ ने निवेशकों को प्रभावित किया, जिससे संबंधित शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
गुरुवार की मजबूत शुरुआत ने यह संकेत दिया है कि बाजार फिलहाल नकारात्मक खबरों को पीछे छोड़ते हुए सकारात्मक वैश्विक संकेतों और संभावित व्यापार समझौतों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। हालांकि आगे चलकर विदेशी निवेशकों की गतिविधि, वैश्विक राजनीति, कच्चे तेल की कीमतें और कॉरपोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे, लेकिन फिलहाल निवेशकों के लिए यह राहत भरा सत्र साबित हुआ है।