भाजपा नेता चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा ने चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग निर्माण के लिए अधिग्रहीत भूमि के ग्रामीणों को मुआवज़ा न मिलने पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने जिलाधिकारी बस्ती को लिखे पत्र में बताया कि जिला प्रशासन के आदेश के बावजूद अब तक प्रभावित ग्रामीणों को उनका कानूनी हक़ मुआवज़ा नहीं दिया गया है। यह मामला न केवल प्रशासनिक उपेक्षा का उदाहरण है बल्कि सरकार की जनहित नीतियों पर भी सवाल उठाता है।
चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा के अनुसार, दिनांक 04 नवम्बर 2024 को जिलाधिकारी ने गर्भूपुर गांव के ग्रामीणों की अधिग्रहीत भूमि के लिए ₹54 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से भुगतान का आदेश दिया था। यह आदेश राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, बस्ती के अधिशाषी अभियंता के पास पहुंचा था लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अधिग्रहित भूमि के ग्रामीण अब तक न तो मुआवज़ा प्राप्त कर पाए हैं और न ही उन्हें न्यायोचित ब्याज का भुगतान किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि अधिग्रहण अवधि 29 सितंबर 2022 से 15 दिसंबर 2023 तक कुल 442 दिनों का ब्याज स्वीकृत किया गया है जबकि वास्तविक ब्याज की गणना भुगतान की तिथि तक की होनी चाहिए। इस असंगति के कारण ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान हो रहा है जो कि न्यायोचित नहीं है।
सुदामा जी ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि ग्रामीणों के साथ यह व्यवहार अत्यंत अन्यायपूर्ण है और इससे प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के अंदर पूरी राशि ब्याज सहित भुगतान नहीं किया गया तो वे प्रभावित ग्रामीणों के साथ मिलकर आर-पार का आंदोलन शुरू करेंगे। उनका यह आंदोलन प्रशासन की उपेक्षा के खिलाफ होगा जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को उनका हक दिलाना होगा।
उन्होंने कहा कि अब और उपेक्षा सहन नहीं की जाएगी। यदि निर्दोष ग्रामीणों को उनका उचित मुआवज़ा नहीं मिला तो वे शांतिपूर्ण लेकिन सशक्त आंदोलन के माध्यम से सरकार और प्रशासन को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराने के लिए बाध्य होंगे।
चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा की यह अपील न केवल ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन और सरकार के प्रति एक मजबूत संदेश भी है कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वे इस मुद्दे को जनहित का मामला मानते हैं और ग्रामीणों के हक की लड़ाई में पूरी ताकत से आगे बढ़ने को तैयार हैं।
यह मामला सामाजिक न्याय, प्रशासनिक जवाबदेही और स्थानीय लोगों के आर्थिक हितों से जुड़ा हुआ है। चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग जैसी बड़ी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्रभावित लोगों को उचित मुआवज़ा देना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस मामले में देरी और उपेक्षा केवल सामाजिक असंतोष को बढ़ावा दे रही है जो अंततः प्रशासन के खिलाफ आंदोलन का रूप ले सकती है।
अतः इस मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है ताकि ग्रामीणों को उनका हक़ मिल सके और प्रशासन की छवि को भी सुधारने का अवसर मिले। चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ की आवाज़ न केवल बस्ती जिले के ग्रामीणों के लिए है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी भी है कि सरकार और प्रशासन को जनता के अधिकारों का सम्मान करना होगा और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देनी होगी।
इस पूरे घटनाक्रम में स्पष्ट हो जाता है कि न्यायोचित मुआवज़ा न मिलने से प्रभावित ग्रामीणों के जीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है। वे अपनी भूमि से वंचित हुए हैं, जिसके बदले उन्हें आर्थिक मुआवज़ा मिलना उनकी आर्थिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ द्वारा इस मुद्दे को उठाना प्रशासन की जवाबदेही को सुनिश्चित करने का प्रयास है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में समय पर उचित समाधान हो सके।
अंततः यह मामला ग्रामीण विकास, प्रशासनिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक हक की लड़ाई का प्रतीक बन गया है। यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन व्यापक स्वरूप ले सकता है, जिससे सामाजिक शांति प्रभावित हो सकती है। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे और प्रभावित ग्रामीणों को मुआवज़ा प्रदान कर मामले को शांति से सुलझाए।