अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने अंतरराष्ट्रीय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का औपचारिक उद्घाटन किया। यह पहल गाजा संघर्ष के समाधान के लिए ट्रंप की 20-बिंदु योजना का हिस्सा है। हालांकि इस आयोजन ने वैश्विक शांति की दिशा में एक कदम के रूप में ध्यान आकर्षित किया, लेकिन उपस्थित देशों की संख्या और दृश्यात्मक स्वरूप ने कई सवाल खड़े कर दिए।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अग्रिम पंक्ति में अनुपस्थिति ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर कूटनीतिक धारणाओं पर सवाल उठाए। उद्घाटन में भाग लेने वाले देशों की संख्या 20 से भी कम थी, जबकि ट्रंप ने इसे एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में प्रचारित किया था।
बोर्ड ऑफ पीस की पृष्ठभूमि
ट्रंप ने 15 जनवरी 2026 को इस पहल की घोषणा की थी। प्रशासन ने 60 देशों को आमंत्रित किया था, जिनमें भारत और चीन जैसे प्रमुख खिलाड़ी और यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के सहयोगी शामिल थे। हालांकि, कुछ देशों ने निमंत्रण स्वीकार किया और कुछ ने राजनयिक या नीति संबंधी कारणों से भाग लेने से इनकार किया।
डावोस कार्यक्रम में अर्जेंटीना के हविएर मिली, इंडोनेशिया के प्रभोवो सुबियंटो, पराग्वे के सैंटियागो पेन, उज़्बेकिस्तान के शवकत मिर्ज़ोयेव, आर्मेनिया के निकोल पाशिन्यान और अज़रबैजान के इल्हाम अलीयेव उपस्थित रहे।
उद्देश्य और कार्यक्षेत्र
व्हाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड का कार्यक्षेत्र शासन क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय संबंध सुधार, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षण और बड़े पैमाने पर फंडिंग जुटाने तक विस्तृत होगा। ट्रंप ने इसे “वैश्विक संघर्ष समाधान का साहसिक नया तरीका” और “अब तक का सबसे प्रभावशाली बोर्ड” बताया। स्थायी सदस्यता के लिए $1 बिलियन का योगदान अपेक्षित है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मंच वैश्विक कूटनीति और निवेश के अवसर पैदा कर सकते हैं, लेकिन सीमित सहभागिता इसे चुनौतीपूर्ण भी बनाती है।
गाजा पर ट्रंप का रुख
ट्रंप ने कहा कि गाजा युद्ध “वास्तव में समाप्ति की ओर है,” लेकिन कुछ छोटे संघर्ष अभी भी शेष हैं। उन्होंने हमास को चेताया: हथियार छोड़ो या परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो। उन्होंने कहा, “उन्हें अपने हथियार छोड़ने होंगे, और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो यह उनके लिए विनाशकारी होगा।”
ट्रंप ने हमास सदस्यों को “हथियारों के साथ जन्मे” बताते हुए उनके गैर-जिम्मेदाराना रवैये को अस्वीकार्य कहा।
राजनयिक और वैश्विक प्रभाव
इस पहल की दृश्यता और देशों की सीमित उपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा की। शहबाज शरीफ की फ्रंट-लाइन में अनुपस्थिति ने पाकिस्तान की भूमिका को कमजोर दर्शाया। केवल 20 से कम देशों की भागीदारी ने ट्रंप की घोषणा और वास्तविक प्रभाव के बीच अंतर उजागर किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड ऑफ पीस का प्रारंभिक चरण सीमित हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह प्रभावशाली मंच बन सकता है, यदि सदस्य देशों की प्रतिबद्धता और संसाधनों की उपलब्धता बनी रहे।
संक्षेप में, डावोस में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का उद्घाटन वैश्विक संघर्ष समाधान की दिशा में ट्रंप प्रशासन का महत्वाकांक्षी कदम है। हालांकि सीमित देशों की भागीदारी और शहबाज शरीफ की अग्रिम पंक्ति में अनुपस्थिति इसे आलोचना के दायरे में ला रही है। गाजा पर ट्रंप का स्पष्ट रुख और हमास के लिए अल्टीमेटम इसे भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाते हैं।
विश्लेषकों का निष्कर्ष है कि फिलहाल यह पहल एक परीक्षण मंच के रूप में है, लेकिन दीर्घकाल में यह वैश्विक शांति प्रयासों और निवेश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।