अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने को दी गई अस्थायी छूट को आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अब इन प्रतिबंधों का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार 11 मार्च से पहले जो कच्चा तेल जहाजों में लोड हो चुका था या समुद्र में ट्रांजिट में था, उसे बेचने की अनुमति दी गई थी, लेकिन वह पुरानी आपूर्ति अब लगभग खत्म हो चुकी है।
दरअसल, 12 मार्च को अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिफाइनरों सहित कई देशों को 30 दिन की विशेष छूट दी थी, ताकि पहले से लदा हुआ रूसी तेल खरीदा और इस्तेमाल किया जा सके। यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए उठाया गया था, क्योंकि उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ रही थी।
मिडिल ईस्ट में संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चली गई थीं। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका ने अस्थायी राहत दी थी और कुछ देशों को सीमित स्तर पर ईरान और रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी थी।
हालांकि अब अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह छूट केवल एक अस्थायी व्यवस्था थी और इसका उद्देश्य रूस या ईरान को अतिरिक्त आर्थिक लाभ पहुंचाना नहीं था। अब जब यह डेडलाइन खत्म हो चुकी है, तो आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।