विन न्यूज़ नेटवर्क। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को छात्र आंदोलन और NEET पेपर लीक का मुद्दा लोकसभा में प्रमुखता से उठा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सदन में कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
लोकसभा में बोलते हुए अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए सरकार से सवाल किया कि क्या लोकतंत्र में अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार उचित है। उन्होंने विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा और कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं।
यह राजनीति नहीं, युवाओं के भविष्य का सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं है। उनके मुताबिक, देश के युवा और छात्र सभी के हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगों की अनदेखी की जाएगी तो स्वाभाविक रूप से वे अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।
सपा प्रमुख ने कहा कि विपक्ष छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहा है। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री से जवाब देने की मांग
अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष को छात्रों के समर्थन में प्रधानमंत्री आवास तक जाना पड़ा, लेकिन अब तक प्रधानमंत्री की ओर से इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब देशभर के लाखों छात्र इस मुद्दे से प्रभावित हैं तो सरकार को संसद में इस विषय पर खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए।
संसद परिसर में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी के सांसदों ने अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने छात्रों के समर्थन में नारे लगाए और प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई।
समाजवादी पार्टी ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह बनाया जाएगा।
सरकार ने दोहराई चर्चा की तैयारी
उधर, सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह NEET पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है। लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार पहले दिन से ही इस विषय पर सार्थक चर्चा चाहती है।
उन्होंने कहा कि चर्चा किस नियम के तहत होगी, कितनी अवधि की होगी और उसका स्वरूप क्या होगा, यह सभी दलों के फ्लोर लीडर्स के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस मुद्दे पर सकारात्मक और रचनात्मक बहस कर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।
किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है और संसद में इस विषय पर व्यापक चर्चा का स्वागत करती है। उन्होंने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की भी अपील की।
NEET विवाद बना सियासी मुद्दा
NEET पेपर लीक का मामला अब शिक्षा के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी प्रमुख विषय बन गया है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां मामले की निष्पक्ष जांच कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना रह सकता है। विपक्ष जहां छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है, वहीं सरकार चर्चा के माध्यम से अपना पक्ष रखने की बात कह रही है।
आने वाले दिनों में सदन के भीतर NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलनों को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।