MRP से ज्यादा कीमत पर सिगरेट बेचना पड़ा भारी, दुकानदार और कंपनी पर लगा 10 लाख रुपये का जुर्माना

Vin News Network
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MRP से ज्यादा वसूली पड़ी भारी!

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला एक अहम मामला सामने आया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने सिगरेट को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से ज्यादा कीमत पर बेचने के मामले में एक दुकानदार और सिगरेट निर्माता कंपनी पर कड़ा रुख अपनाते हुए करीब 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग के इस फैसले के बाद व्यापारियों और दुकानदारों के बीच हलचल मच गई है।

जानकारी के अनुसार, एक ग्राहक ने 29 जनवरी को एक दुकान से ‘क्लासिक’ ब्रांड की सिगरेट का पैकेट खरीदा था। ग्राहक का आरोप था कि सिगरेट के पैकेट पर अंकित MRP से 20 रुपये अधिक वसूले गए। जब उसने इसका विरोध किया तो दुकानदार ने कीमत कम करने से इनकार कर दिया और उससे निर्धारित मूल्य से अधिक राशि ही ली। इसके बाद ग्राहक ने खरीदारी से जुड़े सभी दस्तावेज और सबूत एकत्र कर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

मामले की सुनवाई के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। आयोग की पीठ ने शिकायत को सही मानते हुए दुकानदार और संबंधित कंपनी को जिम्मेदार ठहराया। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 39(1)(क) के तहत दोनों पक्षों पर लगभग 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ग्राहक से अतिरिक्त वसूले गए 20 रुपये 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए जाएं। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और असुविधा के लिए उपभोक्ता को 5,000 रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया है।

यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी उत्पाद को उसके MRP से अधिक कीमत पर बेचना कानून का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर न्याय प्राप्त कर सकते हैं।

अगर किसी ग्राहक से किसी वस्तु के लिए MRP से ज्यादा कीमत वसूली जाती है तो वह सबसे पहले खरीदारी का पक्का बिल या कैश मेमो अपने पास सुरक्षित रखे। इसके बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा ई-दाखिल (E-Daakhil) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है। उपभोक्ता आयोग का यह फैसला न केवल उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करता है, बल्कि दुकानदारों और कंपनियों को भी नियमों का पालन करने की चेतावनी देता है।

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