भारत और कनाडा के बीच आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने की संभावनाएँ लगातार मजबूत हो रही हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में इस बात पर जोर दिया कि दोनों राष्ट्र महत्वपूर्ण खनिजों, परमाणु ऊर्जा और अत्याधुनिक तकनीकों विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अभूतपूर्व स्तर पर साथ काम कर सकते हैं। उनका कहना था कि दोनों देशों के पास न केवल संसाधनों की विविधता है, बल्कि एक-दूसरे की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता भी मौजूद है, जो साझेदारी को और भी महत्वपूर्ण बनाती है।
गोयल का यह बयान उस समय आया जब ठीक एक दिन पहले भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों ने जी-20 सम्मेलन से इतर मुलाक़ात की थी। इस मुलाक़ात में द्विपक्षीय व्यापार को व्यापक बनाने पर सहमति बनी और दोनों नेताओं ने इस बात पर मंजूरी दी कि एक ‘उच्च-स्तरीय’ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर वार्ताओं को जल्द आगे बढ़ाया जाए। इस समझौते का उद्देश्य है दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करना, नई तकनीकों के आदान-प्रदान को गति देना और निवेश संबंधों को मजबूत करना। दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा और हाई-टेक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते कोबाल्ट, लिथियम, निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। कनाडा इन खनिजों का एक बड़ा स्रोत है, जबकि भारत इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से बढ़ा रहा है। ऐसे में दोनों देशों का सहयोग वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती दे सकता है और भारत के ऊर्जा रूपांतरण अभियान को गति प्रदान कर सकता है। गोयल ने कहा कि यदि भारत-कनाडा इन खनिजों पर साझेदारी गहराई से विकसित करते हैं, तो यह न केवल आर्थिक लाभ देगा, बल्कि दोनों देशों को भविष्य की तकनीकों में अग्रणी बनने में भी मदद करेगा।
ऊर्जा सुरक्षा आज वैश्विक चुनौती है, और भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सुरक्षित व स्थायी विकल्पों की तलाश में है। कनाडा परमाणु ऊर्जा तकनीक में दशकों से अग्रणी रहा है। दोनों देशों के बीच पहले से भी परमाणु सहयोग मौजूद है, लेकिन अब इसे एक नए स्तर पर ले जाने की चर्चा हो रही है। संभावित साझेदारी से भारत को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी, जबकि कनाडा के लिए यह एक विश्वसनीय तकनीकी सहयोग का अवसर होगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर-सुरक्षा और डिजिटल नवाचार ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ भारत और कनाडा दोनों की क्षमताएँ तेजी से बढ़ रही हैं। भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बाजारों में से एक है, जबकि कनाडा एआई आधारित अनुसंधान और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के लिए जाना जाता है। गोयल ने कहा कि यदि दोनों देश अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी प्रशिक्षण और निवेश के स्तर पर सहयोग बढ़ाते हैं, तो इससे युवाओं के लिए नए रोजगार और उद्योगों के लिए नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी। CEPA वार्ता फिर से शुरू होने के संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि दोनों देश किसी भी प्रकार के मतभेदों को पीछे छोड़कर व्यापारिक साझेदारी को नए अध्याय में ले जाना चाहते हैं। यह समझौता लागू होने पर वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और तकनीकी सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समझौतों से व्यापार का आकार कई गुना बढ़ सकता है और दोनों देशों के उद्योगों को एक-दूसरे के बाजारों में नई पहुँच मिल सकती है।
कुल मिलाकर, भारत और कनाडा के बीच बढ़ती नज़दीकियाँ संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में दोनों देश न केवल आर्थिक साझेदार बनेंगे, बल्कि तकनीकी और ऊर्जा क्षेत्र में भी एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी साबित होंगे। जी-20 सम्मेलन के बाद जो सकारात्मक वातावरण बना है, वह इस बात का प्रतीक है कि दोनों सरकारें साथ मिलकर भविष्य की चुनौतियों को अवसर में बदलना चाहती हैं।