अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की धनराशि में कथित हेराफेरी और गबन मामले की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी लवकुश मिश्रा से की गई पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर पुलिस का दावा है कि आरोपी ने मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की रकम की गणना के दौरान चोरी, गबन और भ्रष्टाचार किए जाने की बात स्वीकार की है।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह भी बताया कि उसके पास बची हुई धनराशि मंदिर ट्रस्ट को वापस की जानी थी। इसके बाद उसकी निशानदेही पर गवाहों की मौजूदगी में एक स्थान से 500 रुपये के 2,850 नोट बरामद किए गए। इस तरह कुल 14 लाख 25 हजार रुपये की बरामदगी हुई है। पुलिस ने इस बरामदगी को जांच का अहम हिस्सा बताया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को जांच पूरी करने के लिए 15 दिनों का अतिरिक्त समय दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जा रही है ताकि किसी भी तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए।
इस मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसके निर्माण के लिए सदियों तक संघर्ष हुआ है। ऐसे संवेदनशील मामले पर राजनीति करने के बजाय निष्पक्ष जांच होने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईटी को अतिरिक्त समय इसलिए दिया गया है ताकि पूरी पारदर्शिता और व्यवस्थित तरीके से जांच पूरी की जा सके।
वहीं, आरोपी लवकुश मिश्रा के परिवार ने पुलिस के दावों को स्वीकार नहीं किया है। आरोपी की दादी गिरिजा देवी का कहना है कि पुलिस उनसे लगातार पैसों के बारे में पूछताछ कर रही है, लेकिन उन्हें किसी भी रकम की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत भी ठीक नहीं रहती और उन्हें विश्वास है कि उनका पोता ऐसा कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अब आगे जो भी फैसला होगा, वह भगवान की इच्छा के अनुसार होगा।
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और एसआईटी सभी तथ्यों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।