रामपुर: मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में 38 भवनों के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के विरोध में चल रहे छात्रों के अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन ने रविवार को नया मोड़ ले लिया। आंदोलनरत छात्रों के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने प्रशासन से अपील की कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई न की जाए, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
रविवार दोपहर करीब 12 बजे छात्र प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा और जिलाधिकारी कार्यालय में अपना ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई इस पूरे विवाद से प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यदि न्यायालय में मामला विचाराधीन है तो अंतिम निर्णय आने तक किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई से बचा जाना चाहिए।
हालांकि ज्ञापन सौंपे जाने के बाद जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी अपने कार्यालय में मौजूद रहे, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उन्होंने इस मामले पर मीडिया के सामने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था। ऐसे में अब छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन समेत सभी की निगाहें जिलाधिकारी की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि प्रशासन की ओर से मिलने वाले किसी भी आश्वासन के आधार पर आंदोलन की आगे की रणनीति तय हो सकती है।
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय के 38 भवनों को लेकर जारी ध्वस्तीकरण आदेश के विरोध में छात्र-छात्राएं पिछले आठ दिनों से विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आंदोलन के दौरान छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि शिक्षा के अधिकार और विश्वविद्यालय के भविष्य की रक्षा करना है। उनका यह भी कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाना उनका संवैधानिक अधिकार है।
इस आंदोलन को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिल चुका है। इससे पहले 24 जुलाई को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सहित समाजवादी पार्टी के 25 विधायकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग की थी। इसके अगले दिन 25 जुलाई को नौ सांसदों ने भी प्रशासन को ज्ञापन देकर मामले में संवेदनशीलता बरतने और छात्रों के हितों को ध्यान में रखने की अपील की थी।
रविवार को छात्रों द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के साथ यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है। यदि जिलाधिकारी की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलता है, तो लंबे समय से जारी धरना समाप्त होने की संभावना बन सकती है। वहीं, यदि कोई स्पष्ट निर्णय नहीं आता है, तो आंदोलन आगे और तेज होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।