विन न्यूज़ नेटवर्क। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा JPNIC के संचालन को ठेके पर देने की तैयारी के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सार्वजनिक संस्थानों को ठेके पर देना चाहती है तो “पूरी सरकार ही ठेके पर चला दे।”
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब एलडीए ने JPNIC के संचालन और रखरखाव के लिए ग्लोबल टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्ष इसे सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का मुद्दा बना रहा है।
‘JPNIC नहीं चाहिए, हम नया बनाएंगे’
सपा प्रमुख ने कहा कि अब उनकी पार्टी JPNIC लेने की इच्छुक नहीं है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि “हमने अपना मन बदल लिया है। हमारे पास पैसा नहीं है। हमें JPNIC नहीं चाहिए, जिसे लेना हो वह ले ले।”
इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी भविष्य में एक नया जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर बनाएगी। उनके मुताबिक यह नया केंद्र किसी दूसरी जगह स्थापित किया जाएगा, जहां समाजवादी आंदोलन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के योगदान को सम्मानपूर्वक प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वहां संग्रहालय और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी ताकि समाजवादी विचारधारा के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
पहले भी उठा चुके हैं JPNIC का मुद्दा
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने JPNIC को लेकर सरकार को घेरा हो। जुलाई महीने की शुरुआत में उन्होंने सेंटर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसकी स्थिति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि राजनीतिक कारणों से उनकी सरकार के समय शुरू की गई परियोजनाओं को पूरा नहीं होने दिया गया।
सपा अध्यक्ष ने तब कहा था कि वर्ष 2027 में यदि उनकी सरकार बनती है तो अधूरे पड़े विकास कार्यों को पूरा किया जाएगा और प्रदेश में नई विकास योजनाओं को गति दी जाएगी।
मानसून सत्र से पहले सरकार पर कई मुद्दों पर निशाना
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में भी अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर कई मोर्चों पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में 26 हजार से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद किए जा रहे हैं, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और सार्वजनिक संस्थानों से जुड़े फैसलों पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए और जनता के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
JPNIC पर सियासत अभी जारी रहने के संकेत
JPNIC को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। जहां सरकार इसे बेहतर संचालन की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण से जोड़कर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र के दौरान भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठने की संभावना है।