विन न्यूज़ नेटवर्क, लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में परिवार और संगठन की भूमिका को लेकर मायावती ने अपना रुख साफ कर दिया है। बसपा प्रमुख ने कहा है कि पार्टी में उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश आनंद और ईशान आनंद को अब कोई राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
वहीं, जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद की मदद लेने का रास्ता खुला रखा गया है। मायावती के इस फैसले के बाद बसपा में नेतृत्व और परिवार की भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं ने एक नया मोड़ ले लिया है।
कांशीराम के सिद्धांतों का दिया हवाला
मायावती ने अपने फैसले को बसपा संस्थापक कांशीराम की कार्यशैली से जोड़ते हुए कहा कि राजनीति में रिश्तों के मोह से ऊपर उठकर संगठन और मिशन के लिए काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी और अपना जीवन बहुजन समाज के लिए समर्पित किया।
मायावती ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कांशीराम के साथ-साथ बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से भी प्रेरणा ली है। इसी संदर्भ में उन्होंने आंबेडकर के एक पुराने पत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि सार्वजनिक संस्था और संगठन से जुड़े मामलों में निजी रिश्तों को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
आकाश के बाद ईशान को भी नहीं मिली स्थायी जिम्मेदारी
बसपा में पिछले कुछ दिनों में तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। सितंबर की शुरुआत में आकाश आनंद को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी से हटाया गया था। इसके बाद छोटे भाई ईशान आनंद को कुछ राज्यों के संगठनात्मक काम की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे यह चर्चा तेज हुई कि मायावती अब ईशान को आगे बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, यह व्यवस्था ज्यादा समय नहीं चली। छह दिन के भीतर ईशान से भी जिम्मेदारी वापस ले ली गई। इसके बाद मायावती ने साफ किया कि दोनों भतीजों को पार्टी संगठन में आगे कोई पद नहीं दिया जाएगा।
दीपिका के लिए भविष्य का रास्ता खुला
मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद को लेकर अलग रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर उनकी मदद ली जा सकती है। दीपिका फिलहाल सक्रिय राजनीति में नहीं हैं और कानून की पढ़ाई कर रही हैं। ऐसे में पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर अभी कोई औपचारिक नियुक्ति सामने नहीं आई है।
मायावती ने यह भी संकेत दिया कि अगर भविष्य में परिवार से जुड़े किसी सदस्य की भूमिका पार्टी हित के खिलाफ जाती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि संगठन में जिम्मेदारी रिश्तेदारी के आधार पर नहीं, बल्कि पार्टी के प्रति निष्ठा और काम के आधार पर होनी चाहिए।
23 सितंबर को फिर होगी बसपा की अहम बैठक
बसपा की अगली अखिल भारतीय बैठक 23 सितंबर को लखनऊ में प्रस्तावित है। इस बैठक में संगठन को लेकर आगे की दिशा और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा होनी है। हाल के घटनाक्रम को देखते हुए इस बैठक पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजर बनी हुई है।
मायावती ने अपने संदेश में कहा है कि उनका असली परिवार बहुजन समाज है और पार्टी का उद्देश्य इसी समाज के हितों के लिए काम करना है। उन्होंने साफ किया कि संगठन से जुड़े फैसलों में पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।