मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के महापौर चुनाव को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने रितु तावडे को मुंबई मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है, जिस पर शिवसेना–उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा किया है।
रविवार (8 फरवरी) को संजय राउत ने कहा कि बीएमसी चुनाव में मराठी मतदाताओं के जबरदस्त समर्थन के चलते बीजेपी को मजबूरी में एक मराठी उम्मीदवार को महापौर पद के लिए उतारना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के पास अपना कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं था।
रितु तावडे को उम्मीदवार बनाए जाने पर संजय राउत ने कहा कि वह मूल रूप से कांग्रेस से जुड़ी रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने दूसरे दलों से आए नेताओं को आगे कर अपनी राजनीतिक कमजोरी छिपाने की कोशिश की है। राउत ने कहा, “मराठी जनता ने भारी बहुमत से शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को समर्थन दिया, इसी दबाव में बीजेपी को मुंबई में एक मराठी महापौर बनाना पड़ा।”
बीजेपी की उम्मीदवार रितु तावडे के निर्विरोध चुने जाने की पूरी संभावना है, क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) ने मेयर पद के लिए अपना प्रत्याशी उतारने का फैसला नहीं किया है। यदि ऐसा होता है, तो रितु तावडे पिछले चार दशकों में सत्तारूढ़ पार्टी की पहली महापौर होंगी। इसके साथ ही ठाकरे परिवार का बीएमसी पर करीब 25 साल पुराना वर्चस्व समाप्त हो जाएगा।
इस बीच संजय राउत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने शनिवार (7 फरवरी) को आरएसएस के शताब्दी समारोह के दौरान अभिनेता सलमान खान की संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात को लेकर सवाल उठाए। राउत ने कहा, “यह सलमान खान का स्वागत था या यह संदेश कि संघ और उसकी शाखाओं में मुसलमानों का भी स्वागत है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में हिंदू-मुस्लिम नफरत और बदले की भावना को बढ़ावा देने वाले दुष्प्रचार में संघ की भूमिका रही है और इस मुद्दे पर मोहन भागवत को स्पष्टता देनी चाहिए।