तेलंगाना में आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस को अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लेकर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां पार्टी के भीतर दलबदल कर आए विधायकों की मांगों को लेकर असंतोष है, वहीं दूसरी ओर सहयोगी दल तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने कांग्रेस पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस बीच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] ने कांग्रेस को आंशिक समर्थन देने का संकेत दिया है।
सीट बंटवारे पर सहयोगियों की नाराज़गी
कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान हुए समझौतों को लेकर अब मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। टीजेएस और सीपीआई का कहना है कि कांग्रेस ने गठबंधन के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं किया, जिसके कारण उन्हें नगर निकाय चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारने का निर्णय लेना पड़ा है।
टीजेएस के संस्थापक प्रो. एम. कोदंडाराम को कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे के समझौते के तहत विधान परिषद (एमएलसी) के रूप में नामित किया गया था। हालांकि, टीजेएस का आरोप है कि कांग्रेस ने शेष वादों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। गठबंधन के तहत टीजेएस को दो एमएलसी पद, कुछ नगर निगम अध्यक्ष पद और चार जिला निगम अध्यक्ष पद देने का आश्वासन दिया गया था।
इन वादों के पूरा न होने से नाराज़ टीजेएस ने आगामी नगर निकाय चुनावों में 40 नगरपालिकाओं और नगर निगमों में अपने उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है।
सीपीआई का भी स्वतंत्र चुनाव लड़ने का फैसला
टीजेएस के साथ-साथ सीपीआई ने भी कई नगरपालिकाओं और नगर निगमों में अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। सीपीआई नेताओं का कहना है कि पार्टी की पूर्ववर्ती खम्मम और नलगोंडा जिलों में मजबूत पकड़ है और कांग्रेस को गठबंधन के तय मानकों का पालन करना चाहिए।
सीपीआई का तर्क है कि नगर निकाय चुनावों में स्थानीय संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम होती है, ऐसे में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
सीपीआई(एम) का आंशिक समर्थन
कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के दौरान सीपीआई(एम) से समर्थन मांगा था। विधानसभा चुनावों में गठबंधन से बाहर रहने के बावजूद, सीपीआई(एम) ने 17 में से 16 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को समर्थन दिया था। हालांकि, नगर निकाय चुनावों को लेकर सीपीआई(एम) की ओर से स्पष्ट सीट बंटवारे की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पार्टी ने कांग्रेस को आंशिक समर्थन देने का रुख अपनाया है।
कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा तेज की
सहयोगियों की मांगों पर स्पष्ट सहमति बनने से पहले ही कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने विभिन्न नगर निकायों के लिए अपने नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपनी शुरू कर दी हैं।
गुरुवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ और निजामाबाद प्रभारी एन. उत्तम कुमार रेड्डी के साथ गांधी भवन में बैठक की।
इससे पहले, सड़क एवं भवन मंत्री कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी ने नलगोंडा नगर निगम की 48 में से 45 डिवीजनों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। वहीं, टीपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष जग्गा रेड्डी ने सादाशिवपेट नगरपालिका के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की।
दलबदलू विधायकों को लेकर असंतोष
सहयोगी दलों के अलावा, कांग्रेस को पार्टी में शामिल हुए दलबदलू विधायकों की मांगों से भी जूझना पड़ रहा है। जगित्याल के विधायक डॉ. संजय के हाल ही में गांधी भवन में आयोजित पार्टी बैठक में शामिल होने पर पूर्व मंत्री जीवन रेड्डी ने आपत्ति जताई।
जीवन रेड्डी ने चेतावनी दी कि दलबदलू विधायक और उनके समर्थक यदि पार्टी मामलों में हस्तक्षेप करेंगे तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि ऐसी स्थिति राज्य के कुछ अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी देखी जा रही है।
नामांकन की अंतिम तिथि
नगर निकाय चुनावों के लिए शुक्रवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है। सभी दलों के उम्मीदवार नामांकन प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। यदि अंतिम समय तक किसी प्रकार का गठबंधन समझौता होता है, तो उम्मीदवारों के पास 3 फरवरी तक नामांकन वापस लेने का विकल्प रहेगा।