नई दिल्ली। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। योजना लागू होने के केवल छह महीनों के भीतर ही देश के 705 जिलों के 53 हजार से ज्यादा छात्रों ने इसके तहत गारंटी-मुक्त एजुकेशन लोन के लिए आवेदन कर दिया है। यह योजना उन छात्रों के लिए राहत बनकर आई है जिन्हें पढ़ाई के लिए आर्थिक सहयोग की जरूरत है लेकिन गारंटर या जमानत की कमी की वजह से बैंक लोन देने से हिचकते थे।
900 उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्र कवर
फिलहाल देश के 900 उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्रों के लिए यह योजना लागू है। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इंडिया रैंकिंग 2025 आने के बाद और भी संस्थान इस योजना में जुड़ेंगे। इस समय देश के ज्यादातर जिले और प्रमुख विश्वविद्यालय इस योजना में कवर हो चुके हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खासकर उत्तर भारत के संस्थानों के छात्र अब बड़ी संख्या में आवेदन कर रहे हैं।
बिना गारंटर 15 लाख तक का लोन
इस योजना के तहत छात्र चाहे 1 लाख रुपये का लोन लें या 10 लाख का या उससे भी अधिक, उन्हें गारंटर की जरूरत नहीं है। अलग-अलग कोर्सेज के हिसाब से लोन की राशि तय की जाती है। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और मेडिकल के कोर्सेज में लोन राशि ज्यादा है, जबकि अन्य कोर्सेज में अपेक्षाकृत कम है। अगस्त तक आए 53,000 से ज्यादा आवेदनों में से 25,000 को मंजूरी भी मिल चुकी है, जबकि बाकी का प्रोसेस चल रहा है। औसतन एक छात्र ने 15 लाख रुपये तक के लोन के लिए आवेदन किया है।
ब्याज में छूट और आय सीमा
केंद्र सरकार ने वार्षिक 8 लाख रुपये से कम आय वाले छात्रों को राहत दी है। ऐसे परिवारों के छात्रों के 10 लाख रुपये तक के लोन पर सरकार 3% ब्याज खुद देगी। यदि लोन राशि 10 लाख से ज्यादा है तो अतिरिक्त रकम पर ब्याज का भुगतान छात्र को करना होगा। लोन की अपर लिमिट कोर्स की फीस, हॉस्टल फीस, लैपटॉप खर्च, भोजन और अन्य खर्चों को देखकर तय की जाती है। अलग-अलग संस्थानों में कोर्स और हॉस्टल फीस भी अलग-अलग होती है, इसलिए लोन की राशि में अंतर आता है।
सबसे ज्यादा आवेदन किन राज्यों से
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, बिहार, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, केरल से सबसे ज्यादा आवेदन आए हैं। यहां तक कि लद्दाख, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी से भी छात्र आवेदन कर रहे हैं। यदि ओवरऑल एजुकेशन लोन को देखें तो देशभर में पीएम विद्यालक्ष्मी समेत सभी तरह के एजुकेशन लोन के लिए 2.47 लाख आवेदन आए हैं और 15,375 करोड़ रुपये के लोन के लिए आवेदन किया गया है।
राज्यवार आवेदन का चित्र
ओवरऑल आवेदन के लिहाज से तमिलनाडु सबसे आगे है जहां 45,000 छात्रों ने आवेदन किया। उसके बाद
- कर्नाटक – 36,000
- केरल – 34,000
- महाराष्ट्र – 29,000
- उत्तर प्रदेश – करीब 29,000
फिर आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान और तेलंगाना से भी बड़ी संख्या में आवेदन हुए हैं। इससे साफ है कि योजना सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं बल्कि देश के दूरदराज इलाकों तक पहुंच रही है।
छात्रों के लिए राहत और अवसर
बैंकों से बिना गारंटर लोन लेना आमतौर पर मुश्किल होता है। लेकिन प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना ने इस समस्या को खत्म कर दिया है। अब छात्र पढ़ाई के दौरान फीस, हॉस्टल, लैपटॉप और अन्य जरूरी खर्चों के लिए वित्तीय सहयोग आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से खासकर मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी।
आगे क्या
इंडिया रैंकिंग 2025 आने के बाद इस योजना में और संस्थान जोड़े जाएंगे। इससे देशभर के छात्रों के लिए अवसर और बढ़ेंगे। शिक्षा मंत्रालय का लक्ष्य है कि किसी भी छात्र को वित्तीय कारणों से पढ़ाई बीच में न छोड़नी पड़े।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना ने महज छह महीनों में ही हजारों छात्रों को राहत दी है। बिना गारंटर लोन और ब्याज में छूट जैसी सुविधाएं इसे छात्रों के लिए आकर्षक बना रही हैं। आने वाले समय में जब और संस्थान जुड़ेंगे, तब इस योजना का लाभ और ज्यादा छात्रों तक पहुंचेगा।