कण्णूर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता सदानंदन मास्टर को राज्यसभा के लिए नामांकित किए जाने के बाद केरल की राजनीति में एक बार फिर वामपंथी हिंसा का मुद्दा केंद्र में आ गया है। कण्णूर निवासी सदानंदन मास्टर खुद भी वामपंथी हमले का शिकार रह चुके हैं। उनकी नियुक्ति को भाजपा ने राजनीतिक शहादत देने वाले कार्यकर्ताओं के सम्मान से जोड़कर देखा है।
अमित शाह का तीखा बयान, गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर कहा, “यह समय है उन सभी भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं के सपने को साकार करने का, जिन्हें वामपंथी गुंडों ने मौत के घाट उतारा, सदानंदन मास्टर राज्यसभा में उनकी आवाज़ बनेंगे।”
केरल में 300 से अधिक कार्यकर्ता मारे गए
भाजपा का दावा है कि केरल में पिछले कुछ वर्षों में 300 से अधिक आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या वामपंथी संगठनों के द्वारा की गई है। खासकर कण्णूर जैसे ज़िलों में राजनीतिक हिंसा ने कई परिवारों को प्रभावित किया है।
सदानंदन मास्टर कौन हैं?
सदानंदन मास्टर भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता हैं और स्वयं वामपंथी हमले में दोनों पैर गंवा चुके हैं। इसके बावजूद उन्होंने राजनीति और सेवा के रास्ते को नहीं छोड़ा। उनका जीवन संघर्ष भाजपा के लिए प्रेरणास्रोत बना रहा है।
राज्यसभा में वामपंथी हिंसा की गूंज?
विश्लेषकों का मानना है कि सदानंदन मास्टर की राज्यसभा में उपस्थिति से केरल में राजनीतिक हिंसा, वामपंथी चरमपंथ और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज़ हो सकती है।
वामपंथियों की प्रतिक्रिया सधी हुई
वामपंथी दलों ने फिलहाल इस पर कोई तीखा बयान नहीं दिया है, लेकिन अंदरखाने इस निर्णय को राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रयास बताया जा रहा है।