बिजनौर। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब दो बजे उस समय हड़कंप मच गया जब गांव सैफपुर खादर की सड़क पर अचानक एक विशाल मगरमच्छ नजर आ गया। यह मगरमच्छ लगभग आठ फीट लंबा था और गांव से गुजर रहे एक ग्रामीण की नजर उस पर पड़ते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को पकड़ लिया। टीम ने उसे रस्सियों से बांधकर सुरक्षित गंगा नदी में छोड़ा।
ग्रामीणों में फैली दहशत
रात के समय सड़क पर आठ फीट लंबा मगरमच्छ बैठे देख ग्रामीण दंग रह गए। हालांकि, वन विभाग की टीम का कहना है कि इस प्रजाति के मगरमच्छ आमतौर पर इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाते। फिर भी अचानक आबादी वाले इलाके में उनका आ जाना ग्रामीणों के लिए खतरे का संकेत है। गांव के लोगों ने बताया कि रात का समय था, सन्नाटा पसरा हुआ था, तभी अचानक सड़क पर हलचल दिखी। पास जाकर देखने पर पता चला कि यह तो एक बड़ा मगरमच्छ है। कुछ देर तक तो लोग डर के मारे घरों से बाहर नहीं निकले, लेकिन बाद में साहस जुटाकर इसकी सूचना वन विभाग को दी।
वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू
वन विभाग की टीम के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर पहले मगरमच्छ को काबू में किया। इसके बाद रस्सियों की मदद से उसे सुरक्षित पकड़ा गया। टीम ने उसे उसी रात गंगा नदी में ले जाकर छोड़ दिया। क्षेत्रीय वनाधिकारी महेशचंद्र गौतम ने बताया कि यह मगरमच्छ करीब तीन साल का था और इंडियन मार्श क्रोकोडाइल प्रजाति का था। यह प्रजाति आमतौर पर गंगा और उसके किनारे के तालाबों में पाई जाती है।
पहले भी मिल चुका है मगरमच्छ
गौरतलब है कि इससे कुछ दिन पहले ही बिजनौर के नांगल सोती गांव में एक मगरमच्छ नाली के रास्ते से होकर सीधे एक व्यक्ति के घर में घुस आया था। हालांकि, उस समय भी वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकालकर गंगा में छोड़ा था। इससे साफ है कि गंगा किनारे बसे गांवों के लिए यह अब सामान्य खतरा बनता जा रहा है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से की अपील
वन विभाग के अधिकारियों ने अपील की है कि ग्रामीण किसी भी वन्यजीव को देखकर खुद कार्रवाई करने की कोशिश न करें। उन्हें तुरंत वन विभाग को सूचना देनी चाहिए ताकि जानवर को सुरक्षित पकड़ा जा सके और उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके। महेशचंद्र गौतम ने कहा कि मगरमच्छ जैसे वन्यजीव आबादी के पास आ जाते हैं, लेकिन वे अक्सर इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाते। फिर भी सुरक्षा के लिहाज से ग्रामीणों को सावधानी बरतनी चाहिए।
गंगा किनारे क्यों आ जाते हैं मगरमच्छ?
विशेषज्ञों के अनुसार, गंगा किनारे बसे गांवों में जलस्तर और तालाबों की मौजूदगी के कारण मगरमच्छों का आना-जाना आम बात है। कई बार वे भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों में घुस आते हैं। बारिश के मौसम में यह संभावना और ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ का आवागमन आसान हो जाता है।
सैफपुर खादर गांव में सड़क पर निकले आठ फीट लंबे मगरमच्छ ने भले ही ग्रामीणों को डरा दिया हो, लेकिन वन विभाग की त्वरित कार्रवाई ने किसी बड़ी अनहोनी को टाल दिया। इस घटना ने एक बार फिर से यह साफ कर दिया है कि गंगा किनारे बसे गांवों को वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।