गोंडा। रविवार की सुबह गोंडा जिले में एक दर्दनाक हादसे में 11 श्रद्धालुओं की जान चली गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब बोलेरो में सवार सभी लोग गोंडा के प्रसिद्ध पृथ्वीनाथ मंदिर जा रहे थे और रास्ते में सरयू नहर में वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। यह घटना पूरे क्षेत्र में शोक और स्तब्धता की लहर ले आई।
कैसे हुआ हादसा?
यह भीषण हादसा मोतीगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पारासराय-अलावल देवरिया मार्ग पर रेहरा गांव के पास स्थित सरयू नहर पुल के पास हुआ। सीहागांव निवासी प्रह्लाद गुप्ता अपने परिवार और कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ बोलेरो से पृथ्वीनाथ मंदिर दर्शन के लिए रवाना हुए थे। बोलेरो में कुल 15 लोग सवार थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही बोलेरो पुल के पास पहुंची, वाहन चालक का नियंत्रण खो गया। गाड़ी फिसलती हुई सीधे सरयू नहर में जा गिरी। तेज बहाव और गहराई के कारण वाहन कुछ ही मिनटों में पूरी तरह डूब गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी SDRF और पुलिस
स्थानीय लोगों ने हादसे के तुरंत बाद पुलिस को सूचित किया। मोतीगंज थाना, एसडीआरएफ (SDRF) और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। गोताखोरों की मदद से नहर में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद 11 शवों को निकाला गया, जबकि 4 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
जिला अधिकारी नेहा शर्मा और पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ितों के परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
मरने वालों की पहचान
11 मृतकों में अधिकतर एक ही परिवार के सदस्य हैं। मृतकों में महिलाएं, बच्चे और वृद्ध भी शामिल हैं।
प्रह्लाद गुप्ता (42)
सरोज गुप्ता (38)
राजू गुप्ता (15)
आरती देवी (65)
माया देवी (60)
नेहा गुप्ता (18)
मोहित गुप्ता (10)
अन्य मृतकों की पहचान जारी है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने जताया शोक
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है और प्रशासन को घायलों का नि:शुल्क इलाज कराने के निर्देश दिए हैं।
योगी आदित्यनाथ का बयान:
“गोंडा में हुए इस हादसे से अत्यंत दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना। संबंधित अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।”
नहर पर नहीं था कोई सुरक्षा इंतजाम
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरयू नहर पुल पर कोई रेलिंग या सुरक्षा दीवार नहीं थी, जिससे वाहन सीधे नहर में गिर गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी यहां कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
हादसे के बाद गांव में पसरा सन्नाटा
सीहागांव में शोक की लहर है। गांव के लगभग हर घर में चूल्हे नहीं जले। लोगों ने मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए अपनी दुकानें बंद रखीं और सड़क पर मौन जुलूस निकाला।
अधिकारियों से हुई पूछताछ
हादसे के बाद डीएम, एसपी और जल निगम के अभियंता मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी ने सड़क और पुल की स्थिति की समीक्षा की और निर्माण कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर ठेकेदारों पर कार्रवाई के संकेत दिए।
क्या बोले चश्मदीद?
रामस्वरूप सिंह, जो हादसे के समय घटनास्थल पर मौजूद थे, ने बताया: “गाड़ी तेजी से आ रही थी, और जैसे ही पुल आया, वो सीधी नहर में जा गिरी। पानी बहुत गहरा था, हम कुछ कर ही नहीं पाए। केवल चीखें सुनाई दीं… फिर सन्नाटा।”
भविष्य के लिए क्या सबक?
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी इलाकों में सड़क सुरक्षा की स्थिति कितनी बदतर है। नहरों, पुलों और नदी किनारों पर मजबूत सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी संकेत अब केवल औपचारिकताएं नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुके हैं।