विन न्यूज़ नेटवर्क। राजधानी दिल्ली में छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासत लगातार गरमा रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और हालिया प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना शुरू किया, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद भी शामिल हुए।
धरने के दौरान कांग्रेस ने सरकार से छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने, संसद में चर्चा कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग दोहराई। इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
पीएम आवास के बाहर देर रात तक डटे रहेंगे राहुल गांधी
प्रधानमंत्री आवास के बाहर शुरू हुए धरने में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और पार्टी के कई सांसद मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही और पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
बातचीत की कोशिश, लेकिन नहीं निकला समाधान
धरने के बीच केंद्र सरकार की ओर से बातचीत की पहल भी की गई। केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने कांग्रेस नेतृत्व से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन बैठक से कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केवल बातचीत का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग है कि सरकार संसद के भीतर इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान दे और विपक्ष के सवालों का जवाब दे।
संसद में चर्चा की मांग
कांग्रेस का कहना है कि छात्र आंदोलन और हालिया घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार का रवैया सवालों के घेरे में है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि विपक्ष लगातार इस विषय को संसद के दोनों सदनों में उठा रहा है और अब सरकार को स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई
कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई। पार्टी नेताओं का कहना है कि परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार प्रभावी कदम उठाने में असफल रही है। इसी कारण पार्टी लगातार मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस से बातचीत में केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों की चिंताओं को सुनने के बजाय उन पर कार्रवाई किए जाने से असंतोष और बढ़ा है।
पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता पर ध्यान देना चाहिए।
सरकार की ओर से क्या है रुख?
सरकार की ओर से पहले भी कहा जा चुका है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे। केंद्र का कहना है कि जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
दिल्ली में बढ़ी सुरक्षा
धरने और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस ने यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए।
प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
आगे क्या?
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है। वहीं सरकार की ओर से अब तक अपने रुख में कोई बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं।
आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।