विन न्यूज़ नेटवर्क। देशभर में नीट परीक्षा विवाद, कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते छात्रों से संवाद किया होता, तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते।
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। इस मुलाकात के बीच शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई होती तो लाठीचार्ज नहीं होता– अखिलेश
छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को शुरुआत से ही बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था। उनके अनुसार यदि प्रशासन ने छात्रों की बात सुनी होती, तो विरोध प्रदर्शन को इस स्थिति तक पहुंचने से रोका जा सकता था।
उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जा रही आवाजों का जवाब बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद से दिया जाना चाहिए।
पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक इस तरह के मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को समय पर रोजगार नहीं मिल रहा और सरकारी भर्तियों में देरी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। उनके मुताबिक युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक गंभीरता दिखानी चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान को लेकर दिया राजनीतिक संकेत
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यदि किसी मंत्री का विभाग बदला जाता है, तो कई बार उससे सरकार को भी फायदा होता है।
उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि लंबे समय तक एक ही मंत्रालय संभालने से कार्यशैली प्रभावित हो सकती है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि शिक्षा मंत्री को हटाया जाएगा, बल्कि इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से अपनी राय बताया।
राम मंदिर में चोरी के मामले पर भी प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव ने अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर में हुई चोरी की घटना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह घटना गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर भी जवाब देना चाहिए। साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सत्ता में अहंकार नहीं, जवाबदेही होनी चाहिए।
सरकार आंदोलनकारियों की बात सुनने को तैयार नहीं
सपा प्रमुख ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र और युवा अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय विरोध को नियंत्रित करने पर अधिक ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को महत्व दिया जाना चाहिए और छात्रों की चिंताओं का समाधान बातचीत और पारदर्शी कार्रवाई के जरिए किया जाना चाहिए।
राजनीतिक हलचल तेज
नीट परीक्षा विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। वहीं सरकार की ओर से भी परीक्षा प्रणाली को लेकर कई कदम उठाने और सुधार की बात कही जा चुकी है।
इस बीच अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि इस बैठक के एजेंडे या किसी संभावित निर्णय को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
फिलहाल छात्रों का आंदोलन, विपक्ष के आरोप और सरकार की रणनीति, तीनों पर देशभर की नजर बनी हुई है।