मुंबई : महाराष्ट्र में मराठी को लेकर विवाद के बीच ठाणे के भायंदर में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने प्रदर्शन किया। इस बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और स्थानीय विधायक प्रताप बाबूराव सरनाईक वहां पहुंचे, इससे MNS कार्यकर्ता भड़के और उनका विरोध किया।
NCP-SCP विधायक रोहित पवार ने भाषा विवाद को लेकर MNS कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर कहा, …जब हिंदी सख्ती का कायदा महाराष्ट्र में लाया गया तो वह केवल ग्रेड 1 से ग्रेड 4 तक के छात्रों का विषय था। परिजन, राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे इसका विरोध कर रहे थे। दबाव बढ़ने पर सरकार को हार माननी पड़ी और GR वापस लेना पड़ा। भाजपा ने अपने संगठन और भाजपा नेताओं के माध्यम से एक मराठी बनाम गैर मराठी जैसी स्थिति बनाई… हमारा कहना है जो व्यक्ति यहां पर रहते हुए मराठी संस्कृति का मान-सम्मान करता है, वह हमारे लिए मराठी है लेकिन भाजपा ने इस पूरी बहस को ‘मराठी बनाम गैर मराठी’ पर ला दिया है… भाजपा जानबूझकर राजनीति करने के लिए इस आग को बढ़ावा दे रही है।
इससे पहले मंगलवार सुबह पुलिस ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के ठाणे-पालघर प्रमुख अविनाश जाधव समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है। जाधव के नेतृत्व में ये कार्यकर्ता ठाणे के भायंदर में व्यापारियों के विरोध प्रदर्शन के जवाब में एक रैली करने जा रहे थे। पुलिस ने इस रैली की परमिशन नहीं दी थी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मैंने पुलिस कमिश्नर से बात की है, उन्होंने बताया कि रैली के लिए नहीं, बल्कि सभा के लिए अनुमति मांगी गई थी।
भायंदर में ही 1 जुलाई को एक गुजराती दुकानदार को मराठी में बात न करने पर MNS कार्यकर्ताओं ने मारपीट की थी। इसके विरोध में व्यापारियों ने कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था।
मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडे ने भाषा विवाद को लेकर MNS कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर कहा, “हाईकोर्ट के निर्देश के आधार पर हमने कहा कि आप अनुमति ले सकते हैं लेकिन रूट बदल दें। हमारे पास कुछ खुफिया इनपुट भी थे, जिसके मद्देनजर हमने यह फैसला लिया। हमने कुछ लोगों को हिरासत में लिया, मैं शहर के लोगों से पुलिस का सहयोग करने की अपील करता हूं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हम उन्हें सभा की अनुमति दे रहे थे, लेकिन वे उस रास्ते पर मार्च करना चाहते थे जहां ऐसा करना संभव नहीं था। हमने उन्हें दूसरा रास्ता सुझाया, लेकिन वे नहीं माने। यह कहना गलत होगा कि उन्हें अनुमति नहीं दी गई।
सोमवार को ही DCP प्रकाश गायकवाड़ ने आदेश जारी कर जाधव के भायंदर आने पर एक दिन की रोक लगा दी। आदेश में कहा गया कि जाधव पर पहले से 28 आपराधिक केस दर्ज हैं और उनकी मौजूदगी से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
मुंबई के मीरा रोड इलाके का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें MNS कार्यकर्ताओं की गुजराती दुकानदार से मराठी न बोलने पर बहस हुई थी। कार्यकर्ता ने उससे कहा था कि तुमने मुझसे पूछा कि मराठी क्यों बोलनी चाहिए? जब तुम्हें परेशानी थी, तब तुम MNS ऑफिस आए थे।’
दुकानदार ने जवाब में कहा था कि उसे नहीं पता था कि मराठी बोलना अब जरूरी हो गया है। इस पर एक कार्यकर्ता गाली देते हुए दुकानदार को धमकाता है कि उसे इस इलाके में कारोबार नहीं करने दिया जाएगा। बहस के दौरान दुकानदार से मारपीट की गई थी।
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने ‘मराठी एकता’ पर शनिवार यानी 5 जुलाई को मुंबई के वर्ली सभागार में ‘मराठी विजय रैली’ की थी।
राज ठाकरे ने कहा था, ‘चाहे गुजराती हो या कोई और, उसे मराठी आनी चाहिए, लेकिन अगर कोई मराठी नहीं बोलता तो उसे पीटने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कोई बेकार का ड्रामा करता है तो आपको उसके कान के नीचे मारना चाहिए। अगर आप किसी को पीटते हैं, तो घटना का वीडियो न बनाएं।
महाराष्ट्र के भाषा विवाद में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 7 जुलाई को कहा, ‘आप अपने घर महाराष्ट्र में अगर बहुत बड़े बॉस हो तो चलो बिहार, चलो यूपी, चलो तमिलनाडु, तुमको पटक-पटक कर मारेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘अगर आपमें ज्यादा हिम्मत है, आप हिंदी भाषी को मारते हैं तो उर्दू भाषी, तमिल, तेलुगु को भी मारो। आप ये घटिया हरकत कर रहे हो।
भाजपा नेता कृपाशंकर सिंह ने महाराष्ट्र में जारी भाषा विवाद पर कहा, इस विषय को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए… हमारा मानना है कि जिस प्रदेश में जाएं, वहां की भाषा सीखनी चाहिए। यदि भाषा सीखेंगे तो हमें वहां की संस्कृति और वहां के इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने महाराष्ट्र में जारी भाषा विवाद पर कहा, यह देश 140 करोड़ आबादी का है। अलग-अलग राज्यों में अपनी अलग-अलग राजनीति चमकाने के लिए लोग इस तरह का काम कर रहे हैं और जो लोग यह काम कर रहे हैं हम उनकी निंदा करते हैं… केवल वोट की राजनीति के लिए ऐसा किया जा रहा है।
महाराष्ट्र में भाषा विवाद क्या है ?
महाराष्ट्र में अप्रैल में 1 से 5वीं तक के स्टूडेंट्स के लिए तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अनिवार्य की गई थी। ये फैसला राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों पर लागू किया गया था। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के नए करिकुलम को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र में इन क्लासेज के लिए तीन भाषा की पॉलिसी लागू की गई थी। विवाद बढ़ने के बाद अपडेटेड गाइडलाइंस जारी की गई। मराठी और अंग्रेजी मीडियम में कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं। इसके लिए शर्त बस यह होगी कि एक क्लास के कम से कम 20 स्टूडेंट्स हिंदी से इतर दूसरी भाषा को चुनें। ऐसी स्थिति में स्कूल में दूसरी भाषा की टीचर भी अपॉइंट कराई जाएगी। अगर दूसरी भाषा चुनने वाले स्टूडेंट्स का नंबर 20 से कम है तो वह भाषा ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जाएगी।