पटना, बिहार। राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय परिषद के खुले अधिवेशन के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री और पार्टी नेता तेजस्वी यादव की जुबान एक बार फिर फिसल गई। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया जिससे सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। यह घटना ऐसे वक्त पर हुई है जब तेजस्वी शनिवार को ही पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को लेकर अपनी तीखी भाषा और गुस्से को लेकर सुर्खियों में थे।
मीडिया पर दो दिनों में दूसरी बार हमला
शनिवार को तेजस्वी यादव ने प्रेस और पत्रकारों को लेकर आपा खोते हुए बयान दिया था, जिसकी खूब आलोचना हुई। अब रविवार को पार्टी अधिवेशन के मंच से उन्होंने फिर से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर डाला जो उनकी छवि पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अधिवेशन में बोलते समय उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया जिसे मीडिया और विरोधी दलों ने “गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना” बताया है।
तेजस्वी का बयान बना सियासी बहस का मुद्दा
तेजस्वी यादव के इस बयान पर भाजपा और जदयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “तेजस्वी यादव को ये समझना चाहिए कि सार्वजनिक मंच से बार-बार गलत भाषा का प्रयोग उनकी परिपक्वता पर सवाल उठाता है।”
राजद बचाव में उतरी
राजद नेताओं ने तेजस्वी यादव का बचाव करते हुए कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया से संयम बरतने और “पूरे सन्दर्भ में बात समझने” की अपील की है।
तेजस्वी की शैली पर फिर उठे सवाल
तेजस्वी यादव पहले भी कई बार अपने तीखे और कभी-कभी असंतुलित बयानों के कारण विवादों में रहे हैं। ऐसे में दो दिनों में लगातार मीडिया पर निशाना साधना और जुबान फिसलना उनके राजनीतिक व्यवहार और भाषा शैली को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।