पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। चुनावी माहौल के बीच ईद के मौके पर कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला। ईद की नमाज़ के बाद बड़ी संख्या में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने और समाज में विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया।
वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में दावा किया कि मतदाता सूची में संशोधन के नाम पर असली मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, खासकर अल्पसंख्यक इलाकों में। उनका आरोप था कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है और इससे लोगों के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और इसे अदालत तक भी ले जाया गया है।
ममता बनर्जी ने जनता से अपील करते हुए कहा कि आगामी चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और अपने मतदान अधिकार की रक्षा करने का आह्वान किया।
“बंगाल में अघोषित राष्ट्रपति शासन जैसा माहौल”
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर राज्य के कामकाज में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है मानो यहां अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति शासन लागू हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी दबाव में आने वाली नहीं है और राज्य की स्वायत्तता तथा जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।

अपने संबोधन में उन्होंने बंगाल की सामाजिक एकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी समुदाय मिल-जुलकर रहते हैं और किसी भी कीमत पर इस भाईचारे को टूटने नहीं दिया जाएगा।
“ध्रुवीकरण की राजनीति” का आरोप
ममता बनर्जी ने भाजपा पर धार्मिक आधार पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश को हिंदू-मुस्लिम के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब नेता विदेश यात्रा पर जाते हैं तो मित्रता और सहयोग की बात करते हैं, लेकिन देश लौटते ही समाज में विभाजन की राजनीति शुरू हो जाती है।
उनके इस बयान ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है, क्योंकि भाजपा लंबे समय से बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
अभिषेक बनर्जी का भी केंद्र पर निशाना
इस अवसर पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Abhishek Banerjee ने भी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल की सांप्रदायिक सौहार्द्र की परंपरा को किसी भी कीमत पर नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो ताकतें समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं, जनता उन्हें चुनाव में जवाब देगी।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री के बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना गलत है और इससे संवैधानिक पद की गरिमा प्रभावित होती है। भाजपा नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस चुनावी लाभ के लिए भावनात्मक मुद्दों को हवा दे रही है।
चुनावी मुकाबला बेहद कड़ा
पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों के लिए चुनाव दो चरणों में होने हैं। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता होगी और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

राज्य की राजनीति में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश में है, जबकि भाजपा बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
चुनाव का केंद्र बने बड़े मुद्दे
इस चुनाव में मतदाता सूची, घुसपैठ, धार्मिक ध्रुवीकरण और मतदान अधिकार जैसे मुद्दे प्रमुख बनकर उभरे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बयानबाज़ी और तेज होगी, क्योंकि दोनों प्रमुख दल अपने-अपने समर्थकों को mobilize करने में जुटे हैं।
ईद के मंच से दिया गया मुख्यमंत्री का यह भाषण साफ संकेत देता है कि बंगाल का चुनाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वैचारिक और भावनात्मक मुद्दों के इर्द-गिर्द भी लड़ा जाएगा।