ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई करीब 21 घंटे लंबी शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। इस विफल बातचीत के बाद दो सप्ताह के लिए लागू सीजफायर का भविष्य भी अनिश्चित नजर आ रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर वार्ता फेल होने का आरोप लगाया, लेकिन तेहरान ने खास तौर पर अमेरिका की सख्त और बदलती मांगों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश 47 वर्षों में पहली बार अमेरिका के साथ इतने उच्च स्तर पर सीधे संवाद के लिए आगे आया था और समझौता लगभग तय हो चुका था। उनके अनुसार, अंतिम समय में वाशिंगटन के “अतिवादी रुख” और शर्तों में बदलाव के कारण यह डील टूट गई।
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान बातचीत के लिए पूरी नीयत और इच्छाशक्ति के साथ आया था, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण भरोसे की कमी बनी रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी पक्ष ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विश्वास जीतने में असफल रहा।
इस वार्ता का आयोजन “इस्लामाबाद टॉक्स” के तहत 9-10 अप्रैल को किया गया था, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने 40 दिनों के तनाव के बाद दो हफ्तों के सीजफायर की घोषणा की थी। हालांकि, बातचीत के अंत में जेडी वेंस ने स्पष्ट कर दिया कि कोई समझौता नहीं हो सका और यह स्थिति ईरान के लिए अनुकूल नहीं है।
कुल मिलाकर, लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने की दिशा में यह अहम प्रयास भी असफल रहा, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता और बढ़ गई है।