भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) पर हस्ताक्षर के मौके पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने अपने भारतीय मूल और गोवा से पारिवारिक संबंधों की जानकारी साझा की। नई दिल्ली में समझौते पर हस्ताक्षर के बाद उन्होंने अपना ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड दिखाते हुए कहा कि उनकी जड़ें भारत के गोवा राज्य से जुड़ी हैं और यह रिश्ता उनके लिए व्यक्तिगत महत्व रखता है।
OCI कार्ड दिखाकर बोले— “मैं गोवा से हूं”
मंगलवार को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने कहा,
“मैं यूरोपीय परिषद का अध्यक्ष हूं, लेकिन मैं एक ओवरसीज इंडियन सिटीजन भी हूं। इसलिए आप समझ सकते हैं कि यह मेरे लिए कितना खास है। मुझे अपने गोवा के मूल पर गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आया था।”
उन्होंने कहा कि यूरोप और भारत के बीच संबंध उनके लिए केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भी हैं।
भारत-ईयू समझौते के दौरान दिया बयान
एंतोनियो कोस्टा का यह बयान उस समय आया, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर भारत सरकार और यूरोपीय संघ के शीर्ष प्रतिनिधि मौजूद थे। समझौते को दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक करार बताया है।
कोस्टा ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच सहयोग उनके पारिवारिक इतिहास से भी जुड़ा हुआ है, जिससे यह साझेदारी उनके लिए विशेष मायने रखती है।
एंतोनियो कोस्टा का पारिवारिक परिचय
एंतोनियो लुईस सैंटोस दा कोस्टा वर्तमान में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं और इससे पहले वह पुर्तगाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उनका जन्म 1961 में लिस्बन में हुआ था। उनकी मां पुर्तगाली-फ्रांसीसी मूल की थीं, जबकि उनके पिता ऑरलैंडो एंतोनियो फर्नांडिस दा कोस्टा गोवा मूल के थे।
कोस्टा के पिता का परिवार गोवा के मार्गाओ (Margao) से था, जो 1961 तक पुर्तगाली शासन के अधीन ‘एस्टाडो दा इंडिया’ का हिस्सा रहा। उनके दादा का जन्म भी गोवा में हुआ था और उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती वर्ष वहीं बिताए थे।
गोवा और पुर्तगाल से सांस्कृतिक जुड़ाव
एंतोनियो कोस्टा का परिवार पुर्तगाली शासन के दौरान गोवा की कैथोलिक गोअन समुदाय का हिस्सा रहा है, जिसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ें पुर्तगाल से गहराई से जुड़ी रही हैं। हालांकि एंतोनियो कोस्टा का पालन-पोषण और राजनीतिक जीवन पुर्तगाल में ही रहा, लेकिन गोवा उनके पारिवारिक इतिहास का अहम हिस्सा बना रहा।
गोवा और भारतीय प्रवासी समुदाय के कुछ वर्गों में उन्हें स्नेह से “बाबुश” भी कहा जाता है, जो कोंकणी भाषा का शब्द है।
पिता की रचनाओं में गोवा की झलक
एंतोनियो कोस्टा के पिता ऑरलैंडो दा कोस्टा एक लेखक थे। उनकी रचनाओं में गोवा और भारत-पुर्तगाल संबंधों का उल्लेख मिलता रहा है। उनकी पुस्तकों में गोवा के जीवन, कोंकणी शब्दों, स्थानीय खान-पान जैसे सोरपटेल और पारिवारिक परंपराओं के संदर्भ मिलते हैं।
एंतोनियो कोस्टा ने पहले भी यह बताया है कि उनके पिता की किताबों के माध्यम से गोवा हमेशा परिवार की स्मृतियों में मौजूद रहा।
मार्गाओ में पुश्तैनी घर
एंतोनियो कोस्टा का गोवा के मार्गाओ क्षेत्र में अबाडे फारिया रोड पर एक पुश्तैनी घर भी है। वहां उनके विस्तारित परिवार के सदस्य, जिनमें चचेरे भाई और अन्य रिश्तेदार शामिल हैं, अब भी रहते हैं।
उन्होंने वर्ष 2017 में एक निजी यात्रा के दौरान गोवा का दौरा किया था और मार्गाओ स्थित अपने पारिवारिक घर जाकर रिश्तेदारों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने अपने पिता के बचपन से जुड़े स्थानों को भी देखा था।
व्यक्तिगत और कूटनीतिक जुड़ाव
नई दिल्ली में OCI कार्ड दिखाकर दिया गया एंतोनियो कोस्टा का बयान भारत और यूरोप के बीच रिश्तों के मानवीय और सांस्कृतिक पहलू को भी सामने लाता है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के बीच उनके गोवा से जुड़े बयान ने इस ऐतिहासिक मौके को व्यक्तिगत संदर्भ भी प्रदान किया।