पश्चिम एशिया में भीषण युद्ध
पिछले 10 दिनों से पश्चिम एशिया एक भयावह युद्ध की आग में जल रहा है। इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं तो दूसरी तरफ ईरान भी खामोश नहीं बैठा है। वह भी इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर जवाबी हमले कर रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और शांति की कोई उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही। ऐसे में दुनिया की निगाहें किसी ऐसे देश या नेता की तलाश में हैं जो इस युद्ध को रोक सके।
UAE का साफ रुख
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। भारत में UAE के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्जा ने एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि उनका देश इस संघर्ष में किसी भी पक्ष का साथ नहीं देगा। अबू धाबी किसी भी देश को अपनी जमीन का इस्तेमाल लॉन्चिंग पैड के रूप में करने की इजाजत नहीं देगा। मिर्जा ने कहा कि UAE के इस युद्ध में शामिल होने का कोई कारण नहीं है और उनका देश इससे दूर रहना चाहता है।
UAE की अनूठी कूटनीतिक भूमिका
राजदूत मिर्जा ने यह भी बताया कि UAE की भू-राजनीतिक स्थिति बेहद अनूठी है क्योंकि उसके ईरान और इजरायल दोनों के साथ कामकाजी संबंध हैं। इसी वजह से UAE दोनों पक्षों के बीच एक रचनात्मक कूटनीतिक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि UAE दोनों विरोधी पक्षों के बीच बातचीत का पुल बनने में मदद कर सकता है और मध्यस्थता की भूमिका अदा कर सकता है।
मोदी का एक फोन कॉल काफी है
इंटरव्यू का सबसे चर्चित हिस्सा वह था जब राजदूत मिर्जा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्षमता और प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में पीएम मोदी का सम्मान असाधारण है। यह सम्मान केवल राजनीतिक नेताओं तक सीमित नहीं है बल्कि कारोबारी जगत और आम जनता में भी उनकी विश्वसनीयता बहुत गहरी है। मिर्जा ने दावा किया कि इस विश्वसनीयता का उपयोग करते हुए पीएम मोदी ईरान और इजरायल दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी का अपने ईरानी और इजरायली समकक्षों को किया गया महज एक फोन कॉल इस युद्ध को खत्म कर सकता है।
युद्ध का मैदान नहीं बनना चाहिए यह क्षेत्र
राजदूत मिर्जा ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह लड़ाई उस भूमि पर हो रही है जिसे कभी युद्ध का मैदान नहीं बनना चाहिए था। उन्होंने कहा कि दोनों देश हमारी जमीन पर एक-दूसरे से लड़ रहे हैं जो किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। हालाँकि उन्होंने सैन्य पहलुओं पर टिप्पणी करने से परहेज किया और माना कि यह उनकी विशेषज्ञता का क्षेत्र नहीं है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
UAE राजदूत का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक शक्ति का प्रमाण है। जब दुनिया के सबसे बड़े देश और संगठन इस युद्ध को रोकने में विफल हो रहे हैं तब एक खाड़ी देश का यह कहना कि भारत के प्रधानमंत्री का एक फोन कॉल सब कुछ बदल सकता है, भारत की अंतरराष्ट्रीय साख और प्रभाव को दर्शाता है।