कल्पना कीजिये कि अगर अभी आपको पता चले कि आपके पास सिर्फ 14 दिन का ही पानी बचा है यानि आपके पास पानी के जो स्त्रोत हैं वो मात्र 14 दिन में खत्म हो जायेगा। आप के मन में उठा ये ख्याल ही आपको डरा देगा लेकिन डरिये मत यहां भारत में ऐसा कुछ नहीं है बता दे ईरान की राजधानी में लोग इस डर में जी रहे हैं..
तेहरान का अमीर कबीर बांध सूखने के कगार पर है पिछले साल जहां जलाशय पूरे शहर को पानी दे रहा था, इस बार उसमें सिर्फ एक-छठा हिस्सा ही बचा है आधे से ज़्यादा प्रांतों में महीनों से बारिश नहीं हुई है सरकारी इंजीनियरों के मुताबिक, अगले दो हफ्तों में पीने के पानी की सप्लाई भी बंद हो सकती है अब सरकार रात के समय नलों को बंद करने की योजना पर विचार कर रही है ताकि दिन में थोड़ा पानी बचाया जा सके लेकिन असलियत यह है कि अब बांध और भूमिगत जलाशय दोनों सूख चुके हैं!
राष्ट्रपति ने दी जनता को चेतावनी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने चेतावनी दी है कि अगर आने वाले हफ्तों में बारिश नहीं हुई, तो पानी का सख्त बंटवारा करना पड़ेगा.उन्होंने कहा कि अगर नवंबर के अंत तक हालात नहीं सुधरे, तो हमें राशनिंग करनी होगी. और अगर दिसंबर तक भी बारिश न आई, तो तेहरान छोड़ना पड़ सकता है यह बयान केवल एक प्रशासनिक चेतावनी नहीं बल्कि एक गहरी पर्यावरणीय त्रासदी की स्वीकारोक्ति है
आखिर इतने बड़े जल संकट का कारण क्या?
ईरान सरकार ने इस जल संकट का ठीकरा जलवायु परिवर्तन पर फोड़ा है. निश्चित रूप से बदलते मौसम ने हालात बिगाड़े हैं. जहां कभी बर्फ और बारिश से भरपूर पहाड़ हुआ करते थे वहां अब 50 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंच रहा है तेहरान क्षेत्र में 100% वर्षा की कमी दर्ज की गई है लेकिन यह केवल आधी सच्चाई है असली वजह इंसानी गलतियाँ हैं दशकों की गलत नीतियाँ, अनियोजित विकास और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन खेती और पानी के इस्तेमाल की नीतियां गलत , ईरान का लगभग 90 प्रतिशत पानी खेती में खर्च होता है किसान चावल और गेहूं जैसी पानी-खपत वाली फसलें उगाते हैं,जबकि जमीन बंजर होती जा रही है नदियों पर बांध बनाकर प्राकृतिक जल प्रवाह को रोक दिया गया जिससे दलदल और झीलें नष्ट हो गई कभी जीवन देने वाली ज़ायंदेह रुद नदी अब साल में कुछ ही महीनों तक बहती है
भूजल यानि जमीन के अंदर के पानी का अंधाधुंध दोहन
तेहरान के नीचे कभी समृद्ध जलस्तर था, लेकिन शहर ने उसे तेल की तरह निकालकर खत्म कर दिया बिना योजना के कुएं खोदे गए, हर मोहल्ले में नई इमारतें बनी लेकिन जल पुनर्भरण (रिचार्ज) की कोई व्यवस्था नहीं की गई नतीजा भूजल स्तर अब उस गहराई तक गिर गया है जहां से पानी निकालना तकनीकी और आर्थिक दोनों दृष्टि से असंभव हो चुका है।