विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को आतंकवाद और भारत के पड़ोसी नीति पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि भारत को उन पड़ोसियों के खिलाफ अपने अधिकारों का प्रयोग करने का पूरा हक है जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और सहयोगी संबंध एक साथ नहीं चल सकते।
आईआईटी मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा, “जहाँ अच्छे पड़ोसी सहयोग करते हैं, वहीं बुरे पड़ोसी जो लगातार आतंकवाद में लगे रहते हैं, उनके खिलाफ भारत को अपने नागरिकों और देश की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करने का अधिकार है। कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। हम जो करना होगा करेंगे।”
आतंकवाद और पड़ोसी नीति
विदेश मंत्री ने भारत की पड़ोसी नीति पर विस्तार से बात करते हुए बताया कि भारत का दृष्टिकोण सामान्य बुद्धिमत्ता (common sense) पर आधारित है। यह स्पष्ट रूप से अच्छे और बुरे पड़ोसियों के बीच अंतर करता है। जयशंकर ने कहा कि पश्चिम की ओर देखने पर स्पष्ट होता है कि कुछ देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। ऐसे हालात में भारत को अपने लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का अधिकार है।
उन्होंने आतंकवाद को क्षेत्रीय सहयोग और विश्वास के क्षरण से जोड़ा, खासकर जल साझेदारी समझौतों के संदर्भ में। जयशंकर ने कहा, “यदि दशकों तक आतंकवाद होता रहा, तो अच्छे पड़ोसी संबंधों की कोई जगह नहीं है। आप यह नहीं कह सकते कि ‘कृपया पानी साझा करें’ और साथ ही आतंकवाद भी फैलाते रहें। यह असंगत और अस्वीकार्य है।”
अच्छे पड़ोसियों के साथ सहयोग
भारत के दृष्टिकोण में अच्छे पड़ोसियों के साथ सहयोग और समर्थन प्रमुख है। जयशंकर ने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान टीके, यूक्रेन संकट के दौरान ईंधन और खाद्य सहायता, और श्रीलंका की वित्तीय संकट में 4 अरब डॉलर की मदद दी। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति क्षेत्र के लिए लाभकारी है, और अधिकांश पड़ोसी यह समझते हैं कि भारत का विकास उन्हें भी लाभ पहुंचाता है।
जयशंकर ने हाल ही में अपने बांग्लादेश दौरे का जिक्र किया, जहां उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
वैश्विक दृष्टिकोण और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’
विदेश मंत्री ने भारत के वैश्विक दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम का अर्थ केवल शब्द नहीं, बल्कि दुनिया को शत्रु या खतरे के रूप में देखने की बजाय साझेदारी और समाधान के नजरिए से देखना है। उन्होंने भारतीय कूटनीति को समस्या-समाधान, साझेदारी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से समाधान खोजने वाली बताई।
जयशंकर ने भारत की वैश्विक पहल का उदाहरण देते हुए कोविड-19 महामारी में वैक्सीन कूटनीति की भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा, “मेरे पूरे करियर में मैंने कभी ऐसी भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं देखी जैसी दुनिया में टीके देने पर देखी। कई विकासशील और छोटे द्वीप देशों को भारत की मदद की जरूरत थी, जबकि अमीर देश स्टॉकपाइल कर रहे थे।”
संस्कृति, इतिहास और आधुनिक भारत
जयशंकर ने भारत की सभ्यता और आधुनिक वैश्विक भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत उन कुछ प्राचीन सभ्यताओं में से है जो आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में जीवित हैं। उन्होंने कहा, “हमारी पहचान हमारे विश्वास, भाषा और संस्कृति में निहित है। यह पश्चिम विरोधी नहीं बल्कि अपनी विशेषता और रचनात्मकता को प्रकट करने का प्रयास है। वैश्विक विविधता लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करती है।”
जयशंकर का यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए तैयार है, साथ ही मित्र देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देने में विश्वास रखता है।