उत्तराखंड के हरिद्वार में पहली बार अर्द्धकुंभ के दौरान अमृत स्नान का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन 1 जनवरी 2027 से 30 अप्रैल 2027 तक चलेगा। पूरे मेले में कुल दस प्रमुख स्नान होंगे, जिनमें से तीन अमृत स्नानों को विशेष महत्व दिया गया है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डामकोटी में सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अर्द्धकुंभ मेले की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि संतों और अखाड़ों की मांग पर महाकुंभ 2025 की तरह इस बार भी शाही स्नान को अमृत स्नान कहा जाएगा।
साल 2021 में हुए कुंभ मेले में कुल 11 स्नान आयोजित किए गए थे, जिनमें चार शाही स्नान शामिल थे। इस बार अर्द्धकुंभ में शाही स्नानों की संख्या घटकर तीन रह गई है। इसका मतलब है कि इस बार मेले में पिछले कुंभ की तुलना में एक शाही स्नान कम होगा।
अखाड़ों की व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने कहा है कि सभी अखाड़ों को समान समय मिलेगा। प्रत्येक अखाड़े को स्नान के लिए लगभग 30 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, एक अखाड़े का स्नान पूरा होने और घाट की सफाई के बाद ही अगला अखाड़ा स्नान कर सकेगा।
इस बार के अर्द्धकुंभ में अमृत स्नान की शुरुआत और अन्य प्रमुख स्नानों की प्रक्रिया हरिद्वार के घाटों पर धार्मिक आयोजन और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। प्रशासन की तैयारी और अखाड़ों के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मेले का आयोजन सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप से हो।