बरेली में जमीन खरीदना हुआ महंगा: नया सर्किल रेट आज से लागू, दामों में 20% तक की बढ़ोतरी

सपनों का घर अब और महंगा: बरेली में ज़मीनों के दाम 20% तक बढ़े

Vin News Network
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बरेली में ज़मीन की कीमतों को लगा रफ्तार का इंजेक्शन, घर खरीदना हुआ और मुश्किल
Highlights
  • 1 अगस्त 2025 से बरेली में नया डीएम सर्किल रेट हुआ लागू
  • जमीनों की न्यूनतम कीमतों में औसतन 20% की बढ़ोतरी
  • अब नए सर्किल रेट के अनुसार ही रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क लिया जाएगा

बरेली। अगर आप बरेली में ज़मीन या घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो अब उसके लिए अधिक बजट की ज़रूरत होगी।
शुक्रवार, 1 अगस्त 2025 से जिले में नया डीएम सर्किल रेट (Circle Rate) लागू कर दिया गया है, जिसके बाद ज़मीनों की न्यूनतम कीमतों में लगभग 20% तक की बढ़ोतरी हो गई है। बरेली के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में यह बढ़ोतरी की गई है, जिसका असर अब रजिस्ट्रियों और बैनामों पर साफ दिखाई देगा।

एडीएम ने दी जानकारी
बरेली के एडीएम (राजस्व एवं वित्त) संतोष कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए कहा: “बृहस्पतिवार को जो भी बैनामे किए गए, वे सभी पुराने सर्किल रेट पर किए गए थे। लेकिन अब 1 अगस्त से केवल नई दरों के आधार पर ही बैनामे होंगे।” उन्होंने साफ किया कि अब तय की गई न्यूनतम दर से कम पर न तो कोई बिक्री होगी और न ही स्टांप शुल्क लगेगा।

किस-किस इलाके में कितना महंगा हुआ भूखंड?
सिविल लाइंस –
गांधी उद्यान से श्यामगंज चौराहा

  • पहले: ₹59 लाख (1000 वर्ग फीट)
  • अब: ₹70 लाख

रामपुर बाग – डीआईओएस से महालक्ष्मी टावर तक

  • पहले: ₹64 लाख
  • अब: ₹76 लाख

बिहारीपुर सिविल लाइंस – चौपला चौराहा से किला क्रॉसिंग

  • पहले: ₹44 लाख
  • अब: ₹52 लाख

इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और प्रॉपर्टी डीलरों ने कहा कि यह बढ़ोतरी प्रॉपर्टी मार्केट को सीधा प्रभावित करेगी।

शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा असर
बरेली के मुख्य नगर क्षेत्रों जैसे सिविल लाइंस, रामपुर बाग, फाल्तुनगंज, सेमल खेड़ा, गांधी उद्यान क्षेत्र आदि में सबसे अधिक मूल्य वृद्धि दर्ज की गई है। इससे वहां नए मकान बनाने वाले बिल्डरों को भी लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ेगा, जिससे मकानों की बिक्री दर भी बढ़ेगी।

ग्रामीण इलाकों में भी हुआ बदलाव
ग्रामीण क्षेत्रों में भी नया सर्किल रेट लागू किया गया है। गांवों में खेत की जमीन, आबादी क्षेत्र और रोड साइड जमीनों की दरों को नए सिरे से निर्धारित किया गया है। हालांकि यहां बढ़ोतरी का प्रतिशत शहरी क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन खेती के लिए ज़मीन खरीदने वालों पर इसका असर जरूर पड़ेगा।

निवेशक और खरीदारों की चिंता
बरेली रियल एस्टेट डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनीर हुसैन ने बताया: 20 प्रतिशत वृद्धि ने मध्यम वर्ग की पहुंच से प्रॉपर्टी को दूर कर दिया है। पहले से ही रियल एस्टेट में मंदी चल रही है, ऊपर से यह बढ़ोतरी निवेशकों को और हतोत्साहित कर सकती है। मध्यम वर्गीय परिवार जो छोटे भूखंड या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे थे, अब उन्हें होम लोन में अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।

स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस में भी बढ़ोतरी
नई सर्किल दरों के साथ अब बैनामे के लिए ली जाने वाली स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस भी बढ़ जाएगी।
उदाहरण: यदि पहले ₹44 लाख के भूखंड पर ₹2.2 लाख स्टांप लगता था, अब ₹52 लाख पर करीब ₹2.6 लाख स्टांप शुल्क देना होगा। यह सीधा असर राजस्व संग्रहण पर भी डालेगा और सरकार को अतिरिक्त आय होगी।

कब-कब होती है सर्किल रेट में समीक्षा?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष राजस्व विभाग की सिफारिश पर सर्किल दरों की समीक्षा की जाती है। इस प्रक्रिया में स्थानीय मार्केट रेट, मांग और जनसंख्या घनत्व को ध्यान में रखते हुए दरें तय की जाती हैं।

बिल्डरों पर असर: निर्माण लागत बढ़ी
बिल्डर राजीव अग्रवाल ने बताया: “अब प्लॉट खरीदना और भी महंगा हो गया है। इससे फ्लैट्स और डुप्लेक्स यूनिट्स की कीमतें बढ़ेंगी और ग्राहकों की संख्या घटेगी।” बिल्डरों का मानना है कि अगले 3-6 महीने में निर्माण कार्य की गति में 50% तक की गिरावट हो सकती है।

प्रशासन की दलील: पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि जरूरी
प्रशासन का कहना है कि यह कदम भूमि बाजार में पारदर्शिता लाने और सरकारी आय बढ़ाने के लिए आवश्यक था। एडीएम संतोष कुमार ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से बाजार दरों और सरकारी सर्किल दरों में काफी अंतर आ गया था। यह बढ़ोतरी उस अंतर को कम करने का प्रयास है।

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