पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का सीधा असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से एविएशन, पर्यटन और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है। पीएचडीसीसीआई (PHD Chamber of Commerce and Industry) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष के कारण इन क्षेत्रों में लागत बढ़ी है और भारी आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया है।
एविएशन सेक्टर पर सबसे बड़ा दबाव
एविएशन उद्योग को इस संकट से सबसे ज्यादा झटका लगा है। मध्य पूर्व का एयरस्पेस बंद होने और फ्लाइट रूट्स बदलने के कारण उड़ानों का समय 2 से 4 घंटे तक बढ़ गया है। इससे ईंधन की खपत और ऑपरेशनल खर्च में तेज बढ़ोतरी हुई है। पहले ही एयरलाइंस के कुल खर्च का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन का होता है, जो अब और अधिक बढ़ गया है।
पर्यटन उद्योग में गिरावट
युद्ध के कारण विदेशी पर्यटकों में भारत आने को लेकर डर और अनिश्चितता बढ़ी है। इसके चलते विदेशी टूरिस्ट्स की संख्या में लगभग 15 से 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस कमी से पर्यटन उद्योग को करीब 18,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। साथ ही, भारतीय पर्यटक भी अब यूरोप और दुबई की बजाय थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम जैसे देशों को अधिक पसंद कर रहे हैं।
होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर असर
रेस्टोरेंट उद्योग को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस सेक्टर को हर महीने लगभग 79,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और करीब 10 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं। आयात, ट्रांसपोर्ट और बिजली की बढ़ती लागत के कारण कुल खर्च 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिससे छोटे और मझोले कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
होटल उद्योग की स्थिति
होटल सेक्टर फिलहाल स्थिर बना हुआ है, लेकिन दबाव में है। घरेलू पर्यटन के मजबूत रहने से ऑक्यूपेंसी ठीक है, लेकिन विदेशी पर्यटकों पर निर्भर प्रीमियम और बिजनेस होटल्स की आय पर नकारात्मक असर दिख रहा है।
सरकार से राहत की मांग
पीएचडीसीसीआई ने सरकार से कई सुझाव और मांगें रखी हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय उड़ान मार्गों में विविधता लाना, मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करना और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स घटाना शामिल है। इसके अलावा होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर टैक्स का बोझ कम करने, छोटे कारोबारियों को आसान लोन देने और वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग भी की गई है।
घरेलू पर्यटन बना सहारा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घरेलू पर्यटन इस समय उद्योग के लिए सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है। रीवेन्ज ट्रैवल, स्टेकेशन और एक्सपीरिएंशियल डाइनिंग जैसे ट्रेंड्स ने मांग को बनाए रखा है। संगठन का मानना है कि यह संकट भारत के लिए एक अवसर भी है, जिससे देश एक मजबूत और आत्मनिर्भर पर्यटन इकोसिस्टम विकसित कर सकता है।