लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल करें, जिसमें शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रदेश के शिक्षक अनुभवी और योग्य हैं इसलिए उनकी सेवाओं और योग्यता को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि यूपी के शिक्षक नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त करते रहे हैं और उनकी सेवा अवधि और अनुभव को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के अनुभव और योग्यता के सम्मान के साथ इस मामले को न्यायालय के सामने रखा जाएगा।
इस निर्णय का स्वागत यूपी टीचर्स फेडरेशन ने किया है। फेडरेशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री के कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह शिक्षक हित में एक सकारात्मक पहल है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि रिवीजन दाखिल करने से पहले एनसीटीई से यह स्पष्ट कर लिया जाए कि आरटीई एक्ट 2009 के सेक्शन 23(2) का संशोधन उन शिक्षकों पर लागू नहीं होगा जो आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त किए गए थे।