आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक तेजी से दुनिया भर में लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन रही है, लेकिन इसके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कई देश अब बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर सतर्क हो रहे हैं। इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नॉर्वे दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्कूलों में जनरेटिव AI टूल्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह नया नियम सितंबर 2026 से लागू होगा और पहली से सातवीं कक्षा तक के छात्रों पर प्रभावी रहेगा।
बच्चों की बुनियादी शिक्षा को बचाने के लिए लिया गया फैसला
नॉर्वे सरकार का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए पढ़ना, लिखना और गणित जैसी बुनियादी क्षमताओं का विकास बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार के अनुसार, यदि शुरुआती उम्र में बच्चे AI पर अधिक निर्भर हो जाते हैं तो उनकी सीखने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए बच्चों को पहले अपनी बौद्धिक और शैक्षणिक क्षमता विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए, उसके बाद ही उन्हें AI जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाना चाहिए।
रिसर्च में सामने आई चिंताजनक बातें
विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का मानना है कि स्कूलों में जनरेटिव AI का अनियंत्रित उपयोग बच्चों के सीखने के महत्वपूर्ण चरणों को प्रभावित कर सकता है। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि AI पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों की क्रिटिकल थिंकिंग और समस्या समाधान क्षमता को कमजोर कर सकती है। यही वजह है कि नॉर्वे ने शुरुआती शिक्षा स्तर पर AI टूल्स के उपयोग को सीमित करने का निर्णय लिया है।
13 साल से अधिक उम्र के छात्रों पर भी रहेगी निगरानी
हालांकि यह प्रतिबंध केवल 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए लागू होगा, लेकिन इससे अधिक उम्र के छात्रों को भी पूरी तरह स्वतंत्रता नहीं दी जाएगी। स्कूलों में AI टूल्स का उपयोग करने वाले बड़े छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही शिक्षकों को भी AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे छात्रों को सही दिशा में मार्गदर्शन कर सकें।
पहले मोबाइल फोन, अब AI पर भी नियंत्रण
नॉर्वे के स्कूलों में पहले से ही मोबाइल फोन के उपयोग पर सख्त नियम लागू हैं। अब AI टूल्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार सोशल मीडिया को लेकर भी नए कदम उठाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पहुंच सीमित करने पर भी विचार किया जा रहा है।

कनाडा भी कर रहा इसी तरह के कानून की तैयारी
नॉर्वे के इस फैसले के बाद कनाडा भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया और AI चैटबॉट्स पर नियंत्रण संबंधी कानून लाने की दिशा में काम कर रहा है। कनाडाई सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और AI आधारित चैटबॉट्स इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि उपयोगकर्ता लंबे समय तक उनसे जुड़े रहें। इसका असर बच्चों की मानसिक सेहत, एकाग्रता और सामाजिक व्यवहार पर पड़ सकता है। इसी कारण वहां भी बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नए नियम बनाने की तैयारी चल रही है।
AI के दौर में संतुलन बनाने की चुनौती
दुनिया भर में AI तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच नॉर्वे का यह फैसला शिक्षा और तकनीक के बीच संतुलन बनाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश माना जा रहा है। सरकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चों को आधुनिक तकनीक का लाभ भी मिले और उनकी बुनियादी सीखने की क्षमता तथा मानसिक विकास भी प्रभावित न हो। आने वाले समय में अन्य देश भी नॉर्वे के इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।