घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर भारतीय बाजार पर साफ देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 340 अंकों से अधिक टूटकर करीब 77,270 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 50 लगभग 72.85 अंक (0.30%) की गिरावट के साथ 24,070 के आसपास फिसल गया। इसी दौरान भारतीय रुपये में भी कमजोरी दर्ज की गई और डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत पहली बार 96 के पार पहुंच गई।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव माना जा रहा है। इस तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत पर दबाव की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी, ऑटो, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। सेक्टोरल इंडेक्स में भी व्यापक कमजोरी रही और 16 में से 15 सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में करीब 0.21 प्रतिशत, निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.41 प्रतिशत और निफ्टी 500 इंडेक्स में लगभग 0.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
आज के कारोबार में टाटा एलेक्सी, एचसीएल टेक, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी, बायोकॉन और स्पाइसजेट जैसे शेयर निवेशकों के लिए प्रमुख फोकस में रह सकते हैं। इन कंपनियों से जुड़े घटनाक्रम और बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल वैश्विक भू-राजनीतिक हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करेंगी। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच सोच-समझकर तथा लंबी अवधि की रणनीति के साथ निवेश करना चाहिए।