Ranveer Singh की फिल्म Dhurandhar: The Revenge रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। मुंबई में एक सिख संगठन ने फिल्म के मेकर्स और अभिनेता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि फिल्म के पोस्टर और एक सीन में अभिनेता को पगड़ी, लंबी दाढ़ी और कड़ा पहने दिखाया गया है जो सिख धर्म के पवित्र प्रतीक माने जाते हैं लेकिन साथ ही उनके हाथ में सिगरेट भी दिखाई गई। इसी चित्रण को लेकर समुदाय ने गहरी आपत्ति जताई है और इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।
यह शिकायत “सिख्स इन महाराष्ट्र” नामक संगठन की ओर से मुलुंड पुलिस थाने में 17 मार्च को दी गई। संगठन का कहना है कि सिख पहचान के पवित्र प्रतीकों के साथ धूम्रपान दिखाना बेहद आपत्तिजनक है और इससे गलत संदेश जाता है। हालांकि पुलिस ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की है और मामले की जांच जारी बताई जा रही है।
विवाद सिर्फ रणवीर सिंह तक सीमित नहीं है। फिल्म में एक अहम किरदार निभा रहे R. Madhavan भी आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं। आरोप है कि एक सीन में उनके किरदार को गुरबाणी का उच्चारण करते हुए दिखाया गया, जबकि उसी दौरान उनके हाथ में सिगरेट दिखाई देती है। सिख समुदाय और कुछ राजनीतिक नेताओं ने इसे धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया। इस मुद्दे पर Shiv Sena से जुड़े नेताओं ने भी कड़ी नाराज़गी जताई।
हालांकि आर माधवन ने विवाद बढ़ने के बाद सफाई देते हुए कहा कि जिस समय गुरबाणी का पाठ दिखाया गया, उस समय वह सिगरेट नहीं पी रहे थे और सिगरेट पहले ही बुझा दी गई थी। उन्होंने सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए माफी भी मांगी।
दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा विवाद फिल्म की रिलीज के आसपास ही सामने आया, जब फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन कर रही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Dhurandhar: The Revenge ने रिलीज के पहले छह दिनों में ही दुनिया भर में लगभग 900 करोड़ रुपये की कमाई कर ली। यह फिल्म 2025 में आई Dhurandhar का सीक्वल है, जिसने भी वैश्विक स्तर पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी।
फिल्म का निर्माण ज्योति देशपांडे और लोकेश धर ने किया है और इसे हिंदी के साथ-साथ तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में भी रिलीज किया गया है। बड़े बजट, स्टार कास्ट और एक्शन-ड्रामा के कारण फिल्म पहले से ही चर्चा में थी, लेकिन अब धार्मिक विवाद ने इसकी सुर्खियाँ और बढ़ा दी हैं।
सिख समुदाय का कहना है कि फिल्मों और मीडिया में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल बेहद संवेदनशील विषय है और इसे पूरी जिम्मेदारी के साथ दिखाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि मनोरंजन के नाम पर किसी भी धर्म की आस्था या पहचान को गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोग इसे रचनात्मक स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं। उनका कहना है कि किरदार और कहानी की जरूरत के अनुसार लुक और दृश्य तैयार किए जाते हैं, लेकिन यदि किसी समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं तो संवाद के जरिए समाधान निकलना चाहिए।
अभी मामला जांच के दौर में है और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे पुलिस क्या कदम उठाती है और फिल्म के मेकर्स इस विवाद को कैसे संभालते हैं। इतना तय है कि यह मुद्दा सिर्फ एक फिल्म का नहीं, बल्कि कला, आस्था और संवेदनशीलता के बीच संतुलन की बहस को फिर से सामने ले आया है।