केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट 2026–27 पेश करना शुरू किया। बजट प्रस्तुति सुबह 11 बजे लोकसभा में हुई। यह उनका लगातार नौवां बजट है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। बजट 2026 के साथ आयकर से जुड़े प्रावधान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रहे, खासकर मध्यम वर्ग और करदाताओं की उम्मीदों को लेकर।
बजट से पहले करदाताओं की नजर इस बात पर थी कि क्या सरकार पुरानी कर व्यवस्था को समाप्त कर पूरी तरह नई कर व्यवस्था को अपनाने की दिशा में कोई कदम उठाएगी। आयकर ढांचे में संभावित बदलावों को लेकर वेतनभोगी वर्ग और मध्यम आय वर्ग में खास रुचि देखी गई।
संसद में बजट प्रस्तुति
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने से पहले कर्तव्य भवन का दौरा किया। संसद में बजट भाषण के दौरान उन्होंने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं और कर नीति से जुड़े प्रावधानों को प्रस्तुत किया। बजट ऐसे समय में आया है जब करदाता अपनी बचत और खर्च करने की क्षमता को लेकर आयकर प्रावधानों में स्पष्टता की अपेक्षा कर रहे थे।
फ्यूचर्स पर STT में बढ़ोतरी
बजट 2026 में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से जुड़ा एक अहम बदलाव सामने आया। फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT की दर 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दी गई है। यह बदलाव शेयर बाजार में डेरिवेटिव्स सेगमेंट में लेन-देन करने वाले निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की ओर से यह प्रावधान बजट दस्तावेजों के माध्यम से सामने आया है।
ITR संशोधित फाइलिंग की समयसीमा
बजट में आयकर रिटर्न से जुड़े एक अन्य प्रावधान के तहत संशोधित आयकर रिटर्न (Revised ITR) दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दी गई है। इसका उद्देश्य करदाताओं को रिटर्न में त्रुटियों को सुधारने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध कराना है।
नई बनाम पुरानी कर व्यवस्था
नई कर व्यवस्था और पुरानी कर व्यवस्था की तुलना इस बजट में भी चर्चा का विषय रही। नई आयकर व्यवस्था में कम स्लैब दरें दी जाती हैं, लेकिन इसके बदले अधिकांश छूट और कटौतियां उपलब्ध नहीं होतीं। वित्त वर्ष 2025–26 के लिए नई कर व्यवस्था डिफॉल्ट विकल्प है, हालांकि वेतनभोगी करदाता आयकर रिटर्न दाखिल करते समय अब भी पुरानी कर व्यवस्था चुन सकते हैं।
पुरानी कर व्यवस्था के तहत करदाता धारा 80C, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) और होम लोन के ब्याज जैसी विभिन्न छूट और कटौतियों का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि इसमें कर स्लैब की दरें अपेक्षाकृत अधिक हैं, लेकिन जिन करदाताओं के पास अधिक कटौतियां हैं, उनके लिए यह व्यवस्था अभी भी लाभकारी हो सकती है।
नई कर व्यवस्था के तहत आयकर स्लैब
नई कर व्यवस्था को सरल बनाने के उद्देश्य से सरकार ने पिछले बजट में आयकर स्लैब का दायरा बढ़ाया था। इसके तहत 30 प्रतिशत कर की दर अब केवल 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर लागू होती है, जो पहले 15 लाख रुपये से ऊपर की आय पर लागू थी। इससे 15 लाख से 24 लाख रुपये की आय वाले करदाताओं को राहत मिली थी।
पिछले बजट के प्रमुख कर प्रावधान
पिछले वर्ष के बजट में सरकार ने धारा 87A के तहत अधिक रिबेट देकर कर-मुक्त आय की सीमा 12 लाख रुपये तक बढ़ाई थी। साथ ही, वेतनभोगी करदाताओं के लिए मानक कटौती (Standard Deduction) को 75,000 रुपये तक बढ़ाया गया था। इन उपायों का उद्देश्य करदाताओं की टेक-होम सैलरी बढ़ाना था। उस बजट में पुरानी कर व्यवस्था और उससे जुड़ी प्रमुख कटौतियों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
करदाताओं की अपेक्षाएं
बजट 2026 के साथ करदाता इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि सरकार आयकर प्रणाली को सरल बनाने और नई कर व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए आगे क्या कदम उठाती है। आयकर स्लैब, कर दरें और अनुपालन से जुड़े प्रावधान बजट के सबसे अधिक देखे जाने वाले हिस्सों में शामिल रहे।
सरकार के अनुसार, कर नीति का उद्देश्य राजस्व संग्रह के साथ-साथ करदाताओं के लिए पारदर्शिता और सरलता सुनिश्चित करना है।