विन न्यूज़ नेटवर्क। लोकसभा में लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान उस समय तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन चलाने का आदेश देने का आरोप लगाया। राहुल गांधी के इस बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से तत्काल माफी की मांग करते हुए कहा कि बिना किसी प्रमाण के इस तरह के आरोप संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं।
बढ़ते हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। आखिरकार लगातार जारी शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 2:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि देश के गृहमंत्री सदन में मौजूद नहीं हैं और उन्होंने प्रदर्शन कर रहे बच्चों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने गृहमंत्री के काफिले को देखा, जिसमें कई वाहन शामिल थे और दावा किया कि गृहमंत्री सदन में आने से बच रहे हैं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे बच्चों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और इसके लिए आदेश गृहमंत्री की ओर से दिया गया। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए और जोरदार विरोध शुरू हो गया।
रिजिजू ने कहा- आरोप साबित करें या माफी मांगें
राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि संसद में किसी केंद्रीय मंत्री पर इस तरह का गंभीर आरोप लगाने से पहले उसके समर्थन में ठोस प्रमाण होना चाहिए।
रिजिजू ने कहा कि यदि राहुल गांधी के पास ऐसा कोई दस्तावेज, आदेश या आधिकारिक रिकॉर्ड है जिससे यह साबित होता हो कि गृहमंत्री ने ऐसा निर्देश दिया था, तो उसे सदन के पटल पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई सबूत नहीं है तो नेता प्रतिपक्ष को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद में केवल सुर्खियां बटोरने के लिए आरोप लगाना उचित नहीं है और इस तरह की परंपरा लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए ठीक नहीं होगी।
राहुल गांधी के समर्थन में आए अखिलेश यादव
सदन में जारी हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव राहुल गांधी के समर्थन में सामने आए। उन्होंने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किसके आदेश पर किया गया था।
अखिलेश यादव ने कहा कि इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे।
अखिलेश के बयान पर रिजिजू का जवाब
अखिलेश यादव की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि यदि विपक्ष निष्पक्ष जांच की मांग करता है तो वह अलग विषय है, लेकिन किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेकर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं है।
उन्होंने दोहराया कि राहुल गांधी ने सीधे गृहमंत्री का नाम लिया है, इसलिए उन्हें या तो अपने आरोप के समर्थन में प्रमाण देना चाहिए या फिर सदन से माफी मांगनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि संसद में तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, न कि आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर।
राहुल गांधी ने अपने बयान का किया बचाव
राहुल गांधी ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जिस तरह बल प्रयोग हुआ, उसकी अनुमति या तो प्रधानमंत्री दे सकते हैं या फिर केंद्रीय गृहमंत्री। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर उन्होंने अपनी बात सदन में रखी।
हालांकि सत्ता पक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और लगातार माफी की मांग करता रहा। इसके चलते सदन में शोर-शराबा और बढ़ गया।
स्पीकर ओम बिरला ने दी नसीहत
लगातार बढ़ते विवाद के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी सदस्यों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि चर्चा का विषय विधेयक है और उसी पर तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखें।
स्पीकर ने यह भी कहा कि संसद नियमों के अनुसार चलती है और किसी भी सदस्य को बिना प्रमाण के व्यक्तिगत आरोप लगाने से बचना चाहिए। उन्होंने सभी दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया।
हंगामे के बाद स्थगित हुई कार्यवाही
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार जारी नारेबाजी तथा तीखी बहस के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। कई बार व्यवस्था बहाल करने की कोशिशों के बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हुआ। अंततः लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ यह विवाद संसद के भीतर राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया। अब इस मामले पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।