उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को तय करने के लिए राज्य सरकार ने एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। इस आयोग की जिम्मेदारी पंचायतों में ओबीसी आरक्षण की स्थिति का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट सौंपने की होगी। सरकार की मंजूरी के बाद पंचायती राज विभाग की ओर से आयोग गठन की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
राज्य सरकार द्वारा गठित इस पांच सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस राम औतार सिंह को सौंपी गई है। उनके साथ आयोग में चार अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है, जिनमें दो रिटायर्ड अपर जिला जज और दो सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शामिल हैं। आयोग में बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह को सदस्य बनाया गया है।
सरकार का कहना है कि यह आयोग पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग को दिए जाने वाले आरक्षण का विस्तृत अध्ययन करेगा। आयोग विभिन्न जिलों से आंकड़े एकत्र करेगा और सामाजिक व प्रशासनिक आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार आयोग को अपनी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सरकार को सौंपनी होगी। हालांकि आयोग का कार्यकाल छह महीने निर्धारित किया गया है और आवश्यकता पड़ने पर सरकार इसे आगे भी बढ़ा सकती है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनावों का कार्यक्रम तय होने की संभावना है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों का मौजूदा कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया में देरी की स्थिति को देखते हुए ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी दी है।
राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनावों के बाद कराए जा सकते हैं। ऐसे में ओबीसी आरक्षण को लेकर गठित यह आयोग आने वाले चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभा सकता है।