मराठी एकता पर उद्धव-राज एक मंच पर : राज बोले- जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने किया

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, वे हमसे हमेशा पूछते हैं कि हमने BMC में अपने शासन के दौरान मुंबई में मराठी लोगों के लिए क्या किया।

Vin News Network
Vin News Network
14 Min Read
मराठी एकता पर उद्धव-राज एक मंच पर : राज बोले- जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने किया

मुंबई : महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने बेटे और पार्टी नेता आदित्य ठाकरे के साथ वर्ली डोम पहुंचे, जहां उद्धव ठाकरे गुट (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता ने ‘मराठी एकता’ पर संयुक्त रैली की, क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पेश करने के लिए दो सरकारी प्रस्तावों को रद्द कर दिया है।

शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की संयुक्त रैली पर शिवसेना (UBT) नेता अरविंद सावंत ने कहा, ये ऐतिहासिक क्षण है। भाजपा ने देश में सत्ता में आने के बाद विभाजनकारी विचार देश में प्रचारित और प्रसारित किए। लेकिन, आज जोड़ने की प्रक्रिया हो रही है,जुड़ने की प्रक्रिया हो रही है। आज देश को समझ आएगा कि हर राज्य की अपनी अस्मिता होती है उसे ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। राज्य की भाषा का सम्मान होना चाहिए। बात सबका साथ, सबका विकास की करते हो और करते क्या हो? झगड़े लगाते हो।

20 साल बाद मुंबई में एक मंच पर ठाकरे ब्रदर्स, उद्धव बोले- अगर अपनी भाषा के लिए लड़ना गुंडागिरी है, तो हां हम गुंडे हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा, अब वे पूछ रहे हैं कि क्या हम मराठी नहीं हैं? अब हमें यह साबित करने के लिए रक्त परीक्षण करवाना होगा कि हम मराठी हैं? हमें मुंबई मिली, हमने इसके लिए लड़ाई लड़ी, उस समय के राजनेता नहीं चाहते थे कि महाराष्ट्र में मराठी हों.अब केंद्र सरकार कहती है – हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान.हमें हिंदू और हिंदुस्तान तो मंजूर है, लेकिन हिंदी नहीं. हिंदी थोपना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. आपकी सात पीढ़ियां खत्म हो जाएंगी, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।

शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने शिवसेना-मनसे की ‘मराठी विजय रैली’ पर कहा, यह महाराष्ट्र में हम सभी के लिए एक त्यौहार की तरह है कि ठाकरे परिवार के दो प्रमुख नेता, जो अपनी राजनीतिक विचारधाराओं के कारण अलग हो गए थे, आखिरकार 20 साल बाद एक मंच साझा करने के लिए एक साथ आ रहे हैं. हमारी हमेशा से यह इच्छा रही है कि हमें उन लोगों से लड़ना चाहिए जो महाराष्ट्र के लोगों के खिलाफ हैं। आज एक साथ आकर उद्धव और राज ठाकरे निश्चित रूप से मराठी मानुष को दिशा देंगे।

शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) द्वारा संयुक्त रैली के दौरान भाईयों, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने गले मिलकर एक दूसरे को बधाई दी। महाराष्ट्र सरकार ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने के लिए दो सरकारी प्रस्तावों को रद्द कर दिया है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा, मैंने अपने इंटरव्यू में कहा था कि झगड़े से बड़ा महाराष्ट्र है। 20 साल बाद हम एक मंच पर आए हैं, आपको दिख रहे हैं। हमारे लिए सिर्फ महाराष्ट्र और मराठी एजेंडा है, कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। उन्होंने कहा, जो बाला साहेब ठाकरे नहीं कर पाए, जो और कोई नहीं कर पाया, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया, हमें एक कर दिया। आपके पास विधान भवन में ताकत है, लेकिन हमारे पास सड़कों पर ताकत है। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने वह कर दिखाया जो बालासाहेब ठाकरे नहीं सके, मुझे और उद्धव को एक साथ लाना।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, मैं राज ठाकरे का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने दोनों भाइयों के साथ आने का श्रेय मुझे दिया, मुझे बालासाहेब ठाकरे का आशीर्वाद मिल रहा होगा… मुंबई नगर निगम 25 साल तक उनके नियंत्रण में था। फिर भी उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया, जिसे दिखाया जा सके। हमने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मुंबई की सूरत बदल दी। हमने मुंबई के लिए जो काम किया, उससे वे ईर्ष्या करते हैं, लेकिन जनता सब जानती है और सभी हमारे साथ हैं। हम मराठी हैं, हमें मराठी होने पर गर्व है, हमें मराठी भाषा पर गर्व है, लेकिन साथ ही हम हिंदू भी हैं, हमारा हिंदुत्व सभी को साथ लेकर चलता है।

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, हम साथ रहने के लिए साथ आए हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने के सरकारी प्रस्ताव(जीआर) को रद्द करने के बाद, शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) मुंबई के वर्ली डोम में एक संयुक्त रैली कर रहे हैं। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, जब भाजपा कहती है कि उन्हें एक संविधान, एक निशान और एक प्रधानमंत्री चाहिए, तो उन्हें याद रखना चाहिए कि एक निशान तिरंगा है, न कि भाजपा का झंडा, जो बर्तन साफ ​​करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कपड़े का एक टुकड़ा मात्र है।

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, वे हमसे हमेशा पूछते हैं कि हमने BMC में अपने शासन के दौरान मुंबई में मराठी लोगों के लिए क्या किया। अब हम सवाल पूछ रहे हैं,आपके शासन के पिछले 11 वर्षों में, आपने क्या किया है? आपने मुंबई के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को गुजरात में धकेल दिया है। व्यवसाय गुजरात में स्थानांतरित हो रहे हैं। बड़े कार्यालय गुजरात जा रहे हैं। हीरा व्यवसाय पहले ही गुजरात में स्थानांतरित हो चुका है, आपने महाराष्ट्र की रीढ़ तोड़ने के लिए सभी प्रयास किए हैं और ऐसा करना जारी रखा है, और आप हमसे सवाल पूछ रहे हैं?

इसे ‘विजय रैली’ नाम दिया गया। इसमें कांग्रेस शामिल नहीं हुई है। यह रैली किसी भी झंडे या पार्टी के बैनर तले नहीं की गई। कहा गया कि ‘मराठी एकता’ के लिए सभी दल साथ आ सकते हैं। उद्धव और राज आखिरी बार 2006 में बाला साहेब ठाकरे की रैली में साथ दिखे थे। उद्धव को शिवसेना का मुखिया बनाने के बाद राज ने अलग पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) बनाई थी।

दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने इस साल 16 और 17 अप्रैल को हिंदी अनिवार्य करने से जुड़े दो आदेश दिए थे। इसके विरोध में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने 5 जुलाई को संयुक्त रैली का ऐलान किया था। बाद में, 29 जून को सरकार ने दोनों आदेश रद्द कर दिए। इस पर उद्धव दावा किया कि विपक्षी पार्टियों के विरोध की वजह से सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा। उन्होंने 5 जुलाई की विरोध रैली को भी विजय रैली के रूप में करने की बात कही थी।

शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) की संयुक्त रैली पर शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुवेर्दी ने कहा, 19 साल बाद दोनों भाई एक साथ आए हैं। एकजुटता बनी रहेगी। महाराष्ट्र में मराठी हित, महाराष्ट्र का हित सबसे ऊपर है…जनता का उत्साह दिखा रहा है कि उनके मन में कितना था कि दोनों भाई एक साथ आएं।

महाराष्ट्र में मराठी भाषा विवाद बढ़ता जा रहा है। शनिवार सुबह मशहूर इन्वेस्टर सुशील केडिया के वर्ली स्थित ऑफिस में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और MNS चीफ राज ठाकरे के समर्थन में नारे लगाए।

पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है। ये हमला उद्धव और राज ठाकरे की संयुक्त रैली के कुछ घंटे पहले किया गया। ये हमला केडिया के 3 जुलाई की उनकी X पोस्ट के बाद हुआ। उन्होंने मनसे चीफ राज ठाकरे को टैग करते हुए लिखा था, मुंबई में 30 साल रहने के बाद भी मैं मराठी ठीक से नहीं जानता और आपके घोर दुर्व्यवहार के कारण मैंने यह संकल्प लिया है कि जब तक आप जैसे लोगों को मराठी मानुष की देखभाल करने का दिखावा करने की परमिशन नहीं दी जाती, मैं प्रतिज्ञा लेता हूं कि मैं मराठी नहीं सीखूंगा। क्या करना है बोल?

केडिया की पोस्ट के बाद मनसे लीडर संदीप देशपांडे ने लिखा था, अगर आप व्यवसायी हैं तो व्यवसाय करें, हमारे पिता की तरह व्यवहार करने की कोशिश न करें। अगर आप महाराष्ट्र में मराठी का अपमान करते हैं, तो आपको मुंह पर तमाचा पड़ेगा, नहीं तो अपनी हद में रहो, मेहता या कोई भी हो।

वर्ली ऑफिस पर हमले के बाद सुशील केडिया ने शनिवार को X अकाउंट पर वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने राज ठाकरे से माफी मांगी। 3 जुलाई की पोस्ट के बाद केडिया ने X पर बताया था कि उन्हें फोन पर धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने राज ठाकरे, महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस, मुंबई पुलिस को टैग करते हुए लिखा था, राज ठाकरे आपके सैकड़ों कार्यकर्ताओं का मुझे धमकाना मुझे एक धाराप्रवाह मराठी भाषी नहीं बना देगा। इतनी धमकियों के साथ और भी डर है कि अगर मैं एक भी शब्द गलत तरीके से बोलने से चूक गया तो और अधिक हिंसा होगी। राज ठाकरे के कार्यकर्ता धमकियां दे रहे हैं। मुंबई पुलिस मुझे सिक्योरिटी दे। क्या आज महाराष्ट्र में किसी भारतीय को सम्मान और सुरक्षा का कोई अधिकार है, यह एक ऐसा सवाल है जिस पर हमारे गृह मंत्री अमित शाह भी विचार कर सकते हैं।

सुशील केडिया फेमस इन्वेस्टर हैं। वे केडियानॉमिक्स (Kedianomics) नाम की मार्केट रिसर्च फर्म के फाउंडर हैं। उनके पास फाइनेंस फील्ड में 25 साल का एक्सपीरियंस है। केडिया राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बैंकों के साथ काम कर चुके हैं। वे मार्केट टेक्नीशियन एसोसिएशन के डायरेक्टर पैनल में शामिल होने वाले पहले एशियाई व्यक्ति हैं।

मुंबई के मीरा रोड इलाके का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें MNS कार्यकर्ताओं की गुजराती दुकानदार से मराठी न बोलने पर बहस हुई थी। कार्यकर्ता ने उससे कहा था कि तुमने मुझसे पूछा कि मराठी क्यों बोलनी चाहिए? जब तुम्हें परेशानी थी, तब तुम MNS ऑफिस आए थे।

दुकानदार ने जवाब में कहा था कि उसे नहीं पता था कि मराठी बोलना अब जरूरी हो गया है। इस पर एक कार्यकर्ता गाली देते हुए दुकानदार को धमकाता है कि उसे इस इलाके में कारोबार नहीं करने दिया जाएगा। बहस के दौरान दुकानदार से मारपीट की गई थी।

JDU नेता के.सी. त्यागी ने कहा, बिहार के लोग जितने अपमानित मुंबई और महाराष्ट्र में हुए हैं, शायद वे देश के किसी अन्य हिस्से में उतने कभी नहीं हुए हैं। वहां के निर्माण में बिहार के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अगर कांग्रेस को बिहार में चुनाव लड़ना है तो कांग्रेस पार्टी को शिवसेना से अपने संबंध खत्म करने होंगे।

महाराष्ट्र में भाषा विवाद क्या है?

महाराष्ट्र में अप्रैल में 1 से 5वीं तक के स्टूडेंट्स के लिए तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अनिवार्य की गई थी। ये फैसला राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों पर लागू किया गया था। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के नए करिकुलम को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र में इन क्लासेज के लिए तीन भाषा की पॉलिसी लागू की गई थी। विवाद बढ़ने के बाद अपडेटेड गाइडलाइंस जारी की गई।

मराठी और अंग्रेजी मीडियम में कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं। इसके लिए शर्त बस यह होगी कि एक क्लास के कम से कम 20 स्टूडेंट्स हिंदी से इतर दूसरी भाषा को चुनें। ऐसी स्थिति में स्कूल में दूसरी भाषा की टीचर भी अपॉइंट कराई जाएगी। अगर दूसरी भाषा चुनने वाले स्टूडेंट्स का नंबर 20 से कम है तो वह भाषा ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जाएगी।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *