वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि हाल ही में सार्वजनिक किए गए गोपनीय दस्तावेजों से पता चलता है कि चीन ने 2020 के चुनाव के दौरान अमेरिका के 22 करोड़ मतदाताओं का संवेदनशील डेटा अवैध रूप से हासिल किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एफबीआई (FBI) और सीआईए (CIA) जैसी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस मामले की जानकारी तत्कालीन राष्ट्रपति और कांग्रेस से छिपाकर रखी।
18 राज्यों के वोटर्स का डेटा हुआ प्रभावित
डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, वर्ष 2020 में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को 18 राज्यों के मतदाता पंजीकरण (Voter Registration) रिकॉर्ड में सेंध लगने की जानकारी मिल चुकी थी। उनका दावा है कि चीन ने करोड़ों मतदाताओं का डेटा खरीदा, चुराया या हैक किया, लेकिन इस गंभीर सुरक्षा खतरे को सार्वजनिक नहीं किया गया। ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति रहते हुए उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं दी गई और कांग्रेस को भी इस कथित साइबर हमले से अनजान रखा गया।
‘डीप स्टेट’ ने दबाई जानकारी
राष्ट्र के नाम संबोधन में ट्रंप ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के भीतर मौजूद तथाकथित “डीप स्टेट” पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों ने चीन के कथित चुनावी हस्तक्षेप की गंभीरता को जानबूझकर कम करके दिखाया। उनका आरोप है कि राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया ब्रीफिंग (Presidential Daily Brief) से भी चीन से जुड़ी कई अहम जानकारियां हटा दी गई थीं ताकि मामला सामने न आ सके।
चीन मुझे चुनाव जितने नहीं देना चाहता था: ट्रंप
ट्रंप ने दावा किया कि चीन नहीं चाहता था कि वह दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बनें। उन्होंने कहा कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने चीन पर अरबों डॉलर के टैरिफ लगाए थे और अमेरिकी सेना को मजबूत किया था। यही वजह थी कि चीन उनकी नीतियों से नाराज था और 2020 के चुनाव को प्रभावित करने की कथित कोशिश कर रहा था।
CIA रिपोर्ट का हवाला
ट्रंप ने कहा कि सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में शामिल CIA की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 से ही चीन की रणनीति अमेरिका में राष्ट्रपति के समर्थन को कमजोर करने और उनके दोबारा चुने जाने की संभावना खत्म करने की थी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि चीन ने अमेरिकी उद्योगपतियों, मीडिया और अन्य प्रभावशाली वर्गों के जरिए ट्रंप के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की।
बाइडेन के पक्ष में अवैध मतपत्र तैयार कराने का भी आरोप
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि एफबीआई को मिली खुफिया जानकारी में चीन पर तत्कालीन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन के पक्ष में अवैध मतपत्र तैयार कराने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित एजेंसियों ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
22 करोड़ मतदाताओं का संवेदनशील डेटा चोरी होने का दावा
ट्रंप के अनुसार, चीन ने कथित तौर पर 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक दल की प्राथमिकता और अन्य संवेदनशील जानकारियां हासिल कीं। उनका कहना है कि इस डेटा का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और मतदाता पंजीकरण से जुड़ी कथित अवैध गतिविधियों में किया जा सकता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन ने इस उद्देश्य के लिए एक विशेष डेटा एक्सप्लॉइटेशन यूनिट बनाई थी।
पूरे मामले की जांच की मांग
डोनाल्ड ट्रंप ने ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ODNI), न्याय विभाग (DOJ), एफबीआई और सीआईए से इस पूरे मामले की जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने जानबूझकर इस जानकारी को छिपाया है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और आवश्यक होने पर आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जाना चाहिए।