पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के एक विधायक ने नेतृत्व और चुनावी रणनीति बनाने वाली एजेंसी I-PAC पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
लुबेरिया पूर्व से विधायक रिताब्रता बंदोपाध्याय ने दावा किया है कि पार्टी ने उन्हें भ्रष्टाचार के मुद्दों पर बोलने से रोका था। उन्होंने कहा कि उलूबेरिया क्षेत्र में आवास योजनाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, लेकिन जब उन्होंने इसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व को दी तो उन्हें चुप रहने के लिए कहा गया। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि वह “भ्रष्टाचार का बोझ लेकर आगे नहीं बढ़ सकते” और उन्होंने साफ संकेत दिया कि वह पार्टी के कुछ लोगों के साथ काम करने से असहज हैं।
उन्होंने I-PAC की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी रणनीति के दौरान कई अहम मुद्दों को दबाने का दबाव बनाया गया था। उनके अनुसार, एजेंसी के प्रतिनिधियों से संपर्क करना भी मुश्किल होता था और कई बार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर चर्चा करने से रोका गया।
चुनाव में हार के बाद TMC ने विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया था, लेकिन इसमें पार्टी की एकजुटता कमजोर नजर आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के करीब 80 विधायकों में से लगभग 35 विधायक ही इस धरने में शामिल हुए, जबकि 40 से अधिक विधायक अनुपस्थित रहे। इससे पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष की स्थिति और स्पष्ट हो गई।
हालांकि, वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता पद के उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने किसी भी तरह की आंतरिक कलह से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कई विधायक अपने क्षेत्रों में चुनाव बाद की हिंसा और संगठनात्मक कामों में व्यस्त थे, इसलिए वे प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके। चुनाव हार के बाद TMC के भीतर बढ़ती नाराजगी और आरोप-प्रत्यारोप ने पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।