उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हर्षिल घाटी में लगातार तीन बादल फटने की घटनाओं ने क्षेत्र में आपदा की स्थिति पैदा कर दी है। भारी बारिश के कारण धराली और हर्षिल के बीच एक अस्थाई झील बन गई है, जिससे भागीरथी नदी का प्रवाह रुक गया है। नदी के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। जलशक्ति मंत्रालय और आपदा प्रबंधन टीमें मौके पर स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं।
क्या है मामला?
मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे से लेकर 8 बजे तक उत्तरकाशी के हर्षिल घाटी क्षेत्र में तीन बादल फटे। ये घटनाएं क्रमशः धराली, झाला और सुक्की टॉप क्षेत्र में रिकॉर्ड की गईं। पहाड़ों से आने वाला मलबा और पानी मिलकर भागीरथी नदी के प्रवाह को रोकते हुए एक विशाल अस्थाई झील में तब्दील हो गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया
स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक तेज गर्जना के साथ भारी बारिश हुई। नदी का बहाव थम गया और आसपास के इलाकों में पानी भरने लगा। कुछ घरों में पानी घुसने की खबरें भी सामने आ रही हैं।
बाढ़ का खतरा और प्रशासन की तैयारी
भागीरथी नदी के निचले हिस्सों में स्थित गांवों जैसे की भटवाड़ी, गंगनानी, और उत्तरकाशी शहर के कुछ हिस्सों को संभावित बाढ़ से खतरा है। प्रशासन ने चेतावनी जारी कर दी है और लोगों से ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है।
प्रशासनिक अलर्ट
- SDRF और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंची हैं
- गांवों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू
- मोबाइल और सैटेलाइट कम्युनिकेशन के जरिए निगरानी
- आवश्यकतानुसार हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू की तैयारी
- उत्तरकाशी के जिलाधिकारी मेहराज अहमद ने बताया,
स्थिति बेहद संवेदनशील है। हमने हाई अलर्ट जारी कर दिया है और टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। अगर झील टूटी तो नीचे के इलाकों में भारी नुकसान हो सकता है।
अस्थाई झील बनना क्यों खतरनाक है?
जब कोई नदी अवरुद्ध हो जाती है और पानी एकत्र होकर झील बनाता है, तो वह ‘फ्लैश फ्लड’ यानी अचानक बाढ़ का रूप ले सकता है। जब यह अस्थाई अवरोध टूटता है, तो नीचे की ओर भारी मात्रा में पानी बहता है, जो जान-माल की हानि का कारण बन सकता है।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों के लिए उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इससे और भूस्खलन व नदियों में उफान की आशंका है।
पर्यटन पर प्रभाव
हर्षिल घाटी, जो कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, वहाँ फिलहाल आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। कई पर्यटक, जो गंगोत्री और आसपास के ट्रैकिंग पॉइंट्स पर थे, अब बेस कैंप में रुके हुए हैं। प्रशासन ने सभी पर्यटकों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है।
स्थानीय लोगों की जुबानी
शिवानी राणा, एक स्थानीय निवासी ने बताया: “हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा। पहले बादल फटा, फिर सब कुछ शांत… और उसके बाद अचानक नदी का बहाव रुक गया। सब लोग डरे हुए हैं।”
राहत और बचाव कार्य
राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), और उत्तराखंड पुलिस की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। विशेष ड्रोन कैमरों के जरिए इलाके की निगरानी की जा रही है। राज्य सरकार ने सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और आस-पास के जिलों से अतिरिक्त संसाधन उत्तरकाशी भेजे जा रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं ग्लोबल वार्मिंग और अनियमित मॉनसून पैटर्न का परिणाम हो सकती हैं। उत्तराखंड जैसे हिमालयी क्षेत्र में भूमि संरचना संवेदनशील होती है, जिससे भूस्खलन और बादल फटने की संभावना बढ़ जाती है।
अब आगे क्या?
- अस्थाई झील की निगरानी 24×7 की जाएगी
- रेस्क्यू की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं
- तीसरे दिन मौसम में सुधार की संभावना है
- नदी का बहाव सामान्य करने की रणनीति तैयार