6GHz स्पेक्ट्रम बैंड को लेकर भारत सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। सरकार ने इस बैंड के निचले हिस्से यानी 5925 से 6425 मेगाहर्ट्ज तक की फ्रीक्वेंसी को बिना लाइसेंस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलने वाला है, क्योंकि इससे वाई-फाई 6E और वाई-फाई 7 जैसी अत्याधुनिक और तेज इंटरनेट तकनीकों का रास्ता साफ हो गया है।
ET Telecom की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार शाम इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके बाद घरों और दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाला वाई-फाई पहले से कहीं ज्यादा तेज और बेहतर हो सकेगा।
क्यों था विवाद?
लंबे समय से टेलिकॉम कंपनियों और टेक्नोलॉजी कंपनियों के बीच 6GHz स्पेक्ट्रम को लेकर मतभेद चल रहे थे। जियो और एयरटेल जैसी टेलिकॉम कंपनियां इस स्पेक्ट्रम का उपयोग 5G नेटवर्क को मजबूत करने के लिए करना चाहती थीं, वहीं टेक कंपनियां इसे वाई-फाई सेवाओं के लिए जरूरी मान रही थीं। आखिरकार सरकार ने किसी एक पक्ष का समर्थन न करते हुए इसे बिना लाइसेंस के उपयोग के लिए खोलने का फैसला किया।
आम लोगों और देश को क्या फायदा होगा?
6GHz स्पेक्ट्रम के अनलाइसेंस्ड इस्तेमाल से देश की डिजिटल जरूरतें तेजी से पूरी होंगी। अब भारत में वाई-फाई 6E और वाई-फाई 7 को सपोर्ट करने वाले नए राउटर बाजार में उपलब्ध हो सकेंगे। इनके इस्तेमाल से घरों में इंटरनेट की स्पीड बेहतर होगी। इसके साथ ही मोबाइल डेटा पर होने वाला खर्च कम हो सकता है और लाइसेंस वाले स्पेक्ट्रम का उपयोग अन्य जरूरी सेवाओं के लिए किया जा सकेगा।
वाई-फाई 6E और वाई-फाई 7 से क्या बदलेगा?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन नए राउटर्स के इस्तेमाल से डाउनलोड और अपलोड स्पीड में बड़ा सुधार होगा। ऑनलाइन गेमिंग, हाई-क्वालिटी वीडियो स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉलिंग जैसे काम बिना रुकावट और लैग के आसानी से हो सकेंगे।
पहले भी आया था प्रस्ताव
पिछले साल मई में दूरसंचार विभाग ने 6GHz बैंड के 500 मेगाहर्ट्ज हिस्से को इनडोर वाई-फाई के लिए खोलने का प्रस्ताव रखा था, जिसका टेलिकॉम कंपनियों ने विरोध किया था। अब सरकार के ताजा फैसले से 5G नेटवर्क को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा और घरों में वाई-फाई की स्पीड भी बेहतर होगी।