अगर आपको लगता है कि बैंक खाते में रखा आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है, तो नई डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26 आपकी चिंता बढ़ा सकती है। भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In, CSIRT-Fin और साइबर सिक्योरिटी कंपनी SISA द्वारा जारी इस रिपोर्ट में बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर पर तेजी से बढ़ते AI आधारित साइबर हमलों को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार साइबर अपराध अब पहले की तुलना में कहीं अधिक स्मार्ट, तेज और खतरनाक हो चुके हैं।
रिपोर्ट बताती है कि भारत में साइबर हमलों की रफ्तार वैश्विक औसत से लगभग 1.6 गुना अधिक है। वर्ष 2021 में जहां करीब 14 लाख साइबर घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 29 लाख से अधिक पहुंच गई। यानी केवल चार वर्षों में साइबर हमलों की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। सबसे अधिक निशाने पर बैंक, वित्तीय संस्थान और डिजिटल भुगतान सेवाएं हैं।
रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि अब साइबर अपराधी केवल अपनी तकनीकी क्षमता पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। नवंबर 2025 में दुनिया का पहला ऐसा साइबर जासूसी अभियान सामने आया, जिसमें लगभग 80 से 90 प्रतिशत गतिविधियां AI ने खुद संचालित कीं। AI कुछ ही सेकंड में हजारों रिक्वेस्ट भेजकर किसी सिस्टम की कमजोरियां खोज सकता है और वह काम, जिसमें पहले विशेषज्ञ हैकरों को कई सप्ताह लगते थे, अब कुछ मिनटों में पूरा किया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डीपफेक तकनीक साइबर अपराधियों का नया हथियार बन चुकी है। हैकर बड़े अधिकारियों की आवाज और चेहरा हूबहू तैयार कर नकली वीडियो कॉल के जरिए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। इसके अलावा फर्जी दस्तावेज और नकली पहचान का इस्तेमाल कर वीडियो KYC और ऑनलाइन बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया को भी निशाना बनाया जा रहा है।
AI की वजह से फिशिंग ईमेल और फर्जी मैसेज की पहचान करना भी पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। अब ऐसे संदेशों में भाषा संबंधी गलतियां लगभग नहीं होतीं, जिससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते हैं। एक साथ लाखों लोगों को भेजे जाने वाले ऐसे संदेश साइबर ठगी का खतरा कई गुना बढ़ा रहे हैं।
रिपोर्ट में UPI और मोबाइल बैंकिंग को भी सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया है। हैकर OTP सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर तेजी से कई ट्रांजैक्शन करने की कोशिश करते हैं। चूंकि UPI भुगतान रियल टाइम में पूरा हो जाता है, इसलिए कई मामलों में धोखाधड़ी का पता चलने तक पैसे खाते से निकल चुके होते हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि किसी डेटा चोरी का पता लगाने और उसे रोकने में औसतन 263 दिन लग जाते हैं। यानी लगभग नौ महीने तक कोई हैकर किसी सिस्टम के भीतर सक्रिय रह सकता है और संबंधित संस्था को इसकी जानकारी तक नहीं होती। कई मामलों में कंपनियों को अपने सिस्टम में सेंध लगने की जानकारी बाहरी एजेंसियों से मिली, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा ऑडिट और वास्तविक सुरक्षा के बीच अब भी बड़ा अंतर मौजूद है।
रिपोर्ट ने सप्लाई चेन अटैक को भी भविष्य का सबसे बड़ा खतरा बताया है। यदि किसी बैंक का टेक्नोलॉजी पार्टनर या वेंडर साइबर हमले का शिकार होता है, तो उससे जुड़े कई बैंक और लाखों ग्राहक एक साथ प्रभावित हो सकते हैं। हाल के वर्षों में अमेरिका में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां एक ही वेंडर के हैक होने से दर्जनों वित्तीय संस्थानों का डेटा खतरे में पड़ गया।
इसके अलावा रिपोर्ट में क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े भविष्य के साइबर खतरे की भी चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, हैकर अभी से एन्क्रिप्टेड डेटा चुराकर सुरक्षित रख रहे हैं, ताकि भविष्य में शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर उपलब्ध होने पर उसे आसानी से डिक्रिप्ट किया जा सके। इस रणनीति को “हार्वेस्ट नाउ, डिक्रिप्ट लेटर” कहा जा रहा है और इसे बैंकिंग सेक्टर के लिए बेहद गंभीर खतरा माना जा रहा है।
रिपोर्ट में सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य नियामक संस्थाओं को कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं। इनमें डिजिटल ऑनबोर्डिंग के दौरान लिवनेस डिटेक्शन को अनिवार्य बनाना, AI सिस्टम की हैकर की तरह टेस्टिंग करना, बड़े वित्तीय लेनदेन में मानवीय मंजूरी सुनिश्चित करना, साल में एक बार ऑडिट की बजाय लगातार सुरक्षा निगरानी रखना और अगले 18 महीनों में फिशिंग-प्रूफ मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) तथा क्वांटम-प्रूफ एन्क्रिप्शन लागू करने जैसी सिफारिशें शामिल हैं।
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण संदेश आम लोगों के लिए है। आज बैंक खाता, UPI, मोबाइल बैंकिंग, वीडियो KYC और डिजिटल पेमेंट जैसी सुविधाएं साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक, QR कोड, OTP, संदिग्ध संदेश या वीडियो कॉल पर बिना जांचे भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। डिजिटल युग में थोड़ी-सी सतर्कता ही आपकी मेहनत की कमाई और बैंक खाते की सबसे बड़ी सुरक्षा साबित हो सकती है।