“खुल जाएंगे साधुओं के भेष” राजरतन अंबेडकर का नारा, अखिलेश के साथ मिलकर यूपी में मचाया सियासी गदर

Vin News Network
Vin News Network
2 Min Read
हाथ मिले तो हिल गई लखनऊ की गद्दी; बाबा साहेब के प्रपौत्र ने भरी अखिलेश के साथ हुंकार

उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछने लगी है. इस बार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ तब आया जब बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रपौत्र (पड़पोते) राजरतन अंबेडकर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ खड़े नजर आए. लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं की इस मुलाकात ने पूरे प्रदेश का सियासी पारा चढ़ा दिया है.

मंच से राजरतन अंबेडकर ने एक बेहद तीखा और चर्चा बटोरने वाला नारा दिया ‘मिले अंबेडकर और अखिलेश, खुल जाएंगे साधुओं के भेष’. इस नारे के जरिए उन्होंने सीधे तौर पर मौजूदा सत्ता पक्ष पर निशाना साधा है. राजरतन अंबेडकर ने कहा कि अखिलेश यादव ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के जरिए समाज को जोड़ने का काम कर रहे हैं और वे इस संविधान बचाने की लड़ाई में पूरी तरह उनके साथ हैं.

अखिलेश यादव के लिए यह समर्थन काफी मायने रखता है. वे जानते हैं कि अगर उन्हें उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी करनी है, तो दलित वोट बैंक का साथ मिलना बहुत जरूरी है. राजरतन अंबेडकर के साथ आने से दलित समुदाय के बीच यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अब पिछड़े और दलित वर्ग के बड़े चेहरे एक ही मंच पर हैं.

राजनीति के जानकारों का कहना है कि यह गठबंधन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है. अखिलेश यादव की कोशिश है कि मायावती के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई जाए, ताकि 2027 के चुनावों में मुकाबला और भी कड़ा हो सके। फिलहाल, इस नए नारे और गठबंधन ने विपक्ष में नई जान फूंक दी है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रियाओं का इंतजार है.

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *