यूपी की राजनीति में बढ़ी तल्खी, AIMIM ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना

Vin News Network
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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और समाजवादी पार्टी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें अहंकारी बताया और उनकी तुलना महाभारत के दुर्योधन से कर दी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक विस्तृत पोस्ट में शादाब चौहान ने कहा कि महाभारत में दुर्योधन ने अहंकार और महत्वाकांक्षा के कारण पांडवों को पांच गांव तक देने से इनकार कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप कौरवों का विनाश हुआ। उन्होंने दावा किया कि आज भी राजनीतिक परिस्थितियां कुछ वैसी ही दिखाई दे रही हैं और राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है।

AIMIM प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी आबादी के अनुपात में सम्मानजनक राजनीतिक भागीदारी की मांग कर रही है, लेकिन समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी दलों को भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला करना है तो उन्हें सहयोग और साझेदारी की राजनीति अपनानी होगी।

शादाब चौहान ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा को हराने और विपक्षी वोटों के बंटवारे को रोकने के उद्देश्य से गठबंधन के लिए खुले तौर पर पेशकश की थी। उनका दावा है कि पार्टी ने बड़े दिल का परिचय देते हुए सहयोग का प्रस्ताव दिया, लेकिन उसे अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।

उन्होंने समाजवादी पार्टी पर मुस्लिम समुदाय की अपेक्षाओं को पूरा न करने का भी आरोप लगाया। शादाब चौहान के अनुसार, लंबे समय तक समर्थन मिलने के बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास, सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर समुदाय को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि अब राजनीतिक सम्मान और हिस्सेदारी के सवाल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि हाल ही में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश के दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने विधानसभा चुनावों को लेकर विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की संभावना पर भी बयान दिया था। हालांकि AIMIM की ओर से किए गए ताजा हमले पर अभी तक समाजवादी पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव नजदीक आते ही गठबंधन, सीट साझेदारी और वोट बैंक की राजनीति को लेकर बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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